कटघोरा ब्रेकिंग : बगीचा नगर पंचायत में दुकान आवंटन के 'महाघोटालेबाज' तत्कालीन CMO की नई पोस्टिंग से कटघोरा में भी मंचा हड़कंप
Shubh Arvind Sharma
Mon, Oct 12, 2026
कटघोरा ब्रेकिंग:बगीचा नगर पंचायत में दुकान आवंटन के 'महाघोटालेबाज' तत्कालीन CMO की नई पोस्टिंग से कटघोरा में भी मंचा हड़कंप
बगीचा में भ्रष्टाचार के बाद अब कटघोरा नगर पालिका को भी लगा रहे घोटालों का दीमक!
बगीचा में ₹49 हजार का प्रीमियम घोटाला, रसीदों की कूटरचना और कैशबुक गबन के आरोपी अधिकारी की कार्यप्रणाली पर कटघोरा में भी उठे गंभीर सवाल
कटघोरा/बगीचा:सरकारी राजस्व को चूना लगाने और नियमों को अपनी जेब में रखकर मनमानी करने वाले अधिकारियों की फितरत तबादले के बाद भी नहीं बदलती। इसका जीता-जागता उदाहरण जशपुर जिले की नगर पंचायत बगीचा में हुए बहुचर्चित दुकान आवंटन घोटाले से सामने आया है। बगीचा नगर पंचायत में सरकारी संपत्ति की बंदरबांट, रसीदों की जालसाजी और कैशबुक में लाखों रुपये दबाने के मुख्य आरोपी और तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) मुद्रिका प्रसाद तिवारी वर्तमान में कटघोरा नगर पालिका परिषद में पदस्थ हैं। अब बगीचा के इस महाघोटाले के सरकारी दस्तावेज सार्वजनिक होने के बाद कटघोरा क्षेत्र के नागरिकों और जनप्रतिनिधियों में भी हड़कंप मच गया है कि बगीचा में वित्तीय तबाही मचाने के बाद यह अधिकारी अब कटघोरा नगर पालिका की तिजोरी को भी घोटालों का दीमक लगा रहा है।

बगीचा में किया गया था 'वित्तीय भ्रष्टाचार' का सुनियोजित खेल
आधिकारिक जांच दस्तावेजों के अनुसार, तत्कालीन CMO मुद्रिका प्रसाद तिवारी ने बगीचा पदस्थापना के दौरान सहायक राजस्व निरीक्षक मोहन यादव के साथ मिलकर सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुँचाया। बगीचा में उनके द्वारा किए गए काले कारनामों की फेहरिस्त बेहद लंबी है:
* ₹49 हजार की सीधी राजस्व चोरी: वार्ड क्रमांक-07 स्थित बस स्टैंड की बहुमूल्य सरकारी दुकान के लिए नोटशीट में ₹1.59 lakh की प्रीमियम राशि तय की गई थी। लेकिन सीएमओ मुद्रिका प्रसाद तिवारी की संदेहास्पद मेहरबानी से इकरारनामा रहस्यमयी ढंग से सिर्फ ₹1.10 lakh में कर दिया गया।
* फर्जी इकरारनामा: ₹100 के स्टांप पेपर पर तैयार कथित इकरारनामे में न तो नोटरी की गई, न रजिस्ट्रेशन हुआ और न ही कोई गवाह थे। शासकीय नियमों को पैरों तले रौंदकर पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया।
* रसीदों में कूटरचना और जालसाजी: भ्रष्टाचार की हद तो तब पार हो गई जब रसीद क्रमांक 10/903 की मूल प्रति में ₹50,000 लिखे गए, जबकि शासकीय रिकॉर्ड में जमा होने वाली कार्बन कॉपी में चालाकी से सिर्फ ₹30,000 दर्ज किए गए। यह सीधे तौर पर ₹20 हजार के गबन और धोखाधड़ी का मामला है।
* पूरी की पूरी राशि गायब, कैशबुक खामोश: रसीद क्रमांक 903 और 904 के जरिए वसूली गई सरकारी राशि का नगर पंचायत के कैशबुक (रोकड़ बही) में कोई रिकॉर्ड ही नहीं मिला। पैसे डकारने के बाद 1 अक्टूबर 2024 से पूरी कैशबुक, अनुदान पंजी और भंडार पंजी का संधारण ही बंद कर दिया गया था।

बगीचा का तजुर्बा, अब कटघोरा में भी घोटालों की सुगबुगाहट!
बगीचा में छत्तीसगढ़ नगरपालिका (अचल संपत्ति अंतरण) नियम, 1996 के नियम-3 और छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धज्जियां उड़ाने वाले मुद्रिका प्रसाद तिवारी की वर्तमान कार्यप्रणाली अब कटघोरा नगर पालिका में भी संदेह के घेरे में है।
कटघोरा के स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जिस अधिकारी का इतिहास सरकारी रसीदों को बदलने, कैशबुक को गायब करने और शासकीय संपत्तियों की बंदरबांट करने का रहा हो, उसके कटघोरा आते ही यहाँ भी प्रशासनिक और वित्तीय विसंगतियों का खेल शुरू होना तय है। कटघोरा नगर पालिका में वर्तमान में चल रहे विभिन्न टेंडरों, निर्माण कार्यों और राजस्व वसूली के रिकॉर्ड खंगालने पर यहाँ भी बगीचा की तर्ज पर बड़े घपले सामने आने की पूर्ण आशंका जताई जा रही है।
FIR दर्ज करने और कटघोरा से तत्काल हटाने की मांग तेज
बगीचा नगर पंचायत में हुए इस महाघोटाले में तत्कालीन CMO मुद्रिका प्रसाद तिवारी के हस्ताक्षरयुक्त पुख्ता दस्तावेज सामने आने के बाद जशपुर से लेकर कोरबा जिले तक प्रशासनिक गलियारों में खलबली मची हुई है।
जांच प्रतिवेदन के आधार पर क्षेत्र की जनता और सजग जनप्रतिनिधियों ने उपमुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव तथा जिला प्रशासन से मांग की है कि:
1. शासकीय धन का आपराधिक गबन करने और रसीदों में हेराफेरी करने के जुर्म में मुद्रिका प्रसाद तिवारी के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए।
2. कटघोरा नगर पालिका की वित्तीय सुरक्षा को देखते हुए इस दागी अधिकारी को तुरंत प्रभाव से पद से निलंबित (Suspend) किया जाए, ताकि यह कटघोरा में बगीचा जैसा कोई नया घोटाला न कर सके।
3. मुद्रिका प्रसाद तिवारी के कटघोरा में पदभार ग्रहण करने के बाद से अब तक के सभी वित्तीय लेन-देन और कैशबुक की विशेष ऑडिट (जांच) कराई जाए।
पंजीयन रद्द करने और विभागीय ब्लैकलिस्ट की ओर बढ़ते कदम
इस पूरे प्रकरण में सबसे गंभीर पहलू यह है कि शासकीय सेवा में रहते हुए जनता के विश्वास और राजकोष के साथ ऐसा खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। बगीचा से लेकर कटघोरा तक फैले भ्रष्टाचार के इन जालों ने यह साफ कर दिया है कि ऐसे अधिकारियों के रहते नगरीय निकायों में पारदर्शिता की उम्मीद करना बेमानी है। सूत्रों के मुताबिक, इस मामले की फाइल अब मंत्रालय स्तर पर पहुच गई है, जहां न केवल दागी अधिकारियों पर निलंबन (Suspension) और एफआईआर (FIR) की तलवार लटक रही है, बल्कि इस भ्रष्टाचार में शामिल ठेकेदारों और दलालों के पंजीयन निरस्त कर उन्हें हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी भी की जा रही है। अब देखना यह होगा कि सुशासन का दम भरने वाली सरकार इस 'घोटालेबाज' तंत्र पर कब और कितना बड़ा हंटर चलाती है।
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कोरबा कटघोरा
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