कटघोरा नगर पालिका: : घोटालों पर भाजपा पार्षदों और एल्डरमैनों का 'मौन व्रत'; निधि रुकने का डर या पालिका का 'अप्रत्यक्ष लाभ' ?
Shubh Arvind Sharma
Tue, Sep 1, 2026
कटघोरा नगर पालिका: करोड़ों के कथित घोटालों पर भाजपा पार्षदों और एल्डरमैनों का 'मौन व्रत'; निधि रुकने का डर या पालिका का 'अप्रत्यक्ष लाभ' ?
कटघोरा। नगर पालिका कटघोरा इन दिनों विकास कार्यों के बजाय चौतरफा कथित भ्रष्टाचार, प्रशासनिक मनमानी और बड़े-बड़े घोटालों के आरोपों की वजह से पूरे क्षेत्र में सुर्खियों में है। लेकिन इस पूरे महासंग्राम में सबसे ज्यादा हैरान और आक्रोशित करने वाला पहलू विपक्ष की भूमिका को लेकर सामने आ रहा है। नगर की बदहाली और जनता के पैसों की खुली लूट के आरोपों पर विपक्ष में बैठी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पार्षदों और मनोनीत एल्डरमैनों ने पूरी तरह से रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है, जिसे लेकर अब नगर में तीखे सवाल उठने लगे हैं।

राजनीतिक गलियारों और दबी जुबान की चर्चाओं में इस 'मौन व्रत' के पीछे के दो बड़े और कड़वे कयास लगाए जा रहे हैं। पहला यह कि कुछ जनप्रतिनिधियों को मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) का कथित तौर पर इतना खौफ है कि उन्हें डर सता रहा है कि आवाज उठाने पर प्रशासनिक नियमों का हवाला देकर उनकी पार्षद व एल्डरमैन निधि को रोक दिया जाएगा। वहीं, दूसरा और सबसे गंभीर आरोप यह है कि अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष के कुछ पार्षदों ने पालिका प्रशासन और सत्तापक्ष से भीतर ही भीतर कथित 'सैटिंग' कर ली है। चर्चा है कि इन पार्षदों को नगर पालिका के भीतर निजी तौर पर पेटी कॉन्ट्रैक्ट (काम) और अप्रत्यक्ष ठेके दे दिए गए हैं। आरोप लग रहे हैं कि काम और मोटा कमीशन जेब में जाते ही इन माननीय जनप्रतिनिधियों ने जनता के मुद्दों से पूरी तरह मुंह मोड़ लिया है। नगर में यह चर्चा आम है कि इन्हें अब सिर्फ अपने मुनाफे से मतलब रह गया है और जनता के सुख-दुख से इनका कोई सरोकार नहीं दिख रहा है, हालांकि इन आरोपों की सत्यता जांच का विषय है।
कथित घोटालों और अव्यवस्था की वो लंबी फेहरिस्त, जिस पर विपक्ष मौन है:

* अटल परिसर मामला (कांस्य की जगह सीमेंट की मूर्ति का आरोप): नगर पालिका का सबसे चर्चित कारनामा भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर बने अटल परिसर में देखने को मिला है। आरोप है कि करोड़ों की लागत वाले इस परिसर में नियमानुसार ब्रॉन्ज (कांस्य) की भव्य प्रतिमा स्थापित होनी थी। लेकिन अफसरों और ठेकेदारों की कथित जुगलबंदी ने वहां सीमेंट की घटिया मूर्ति खड़ी कर दी। पहली ही बारिश में जब मूर्ति का पेंट उखड़ा, तो इस कथित महाघोटाले की पोल खुली। जनता में आक्रोश है कि इस कथित अपमान पर भी भाजपा पार्षदों का खून नहीं खौला, क्योंकि उनके मुंह पर कथित तौर पर ठेकों का 'टेप' लगा हुआ था।
* सरगबन्ध तालाब टेंडर में धांधली के आरोप: नगर के ऐतिहासिक सरगबन्ध तालाब के सौंदर्यीकरण और जीर्णोद्धार के नाम पर निकाले गए टेंडर में भारी वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे हैं। आरोप है कि चहेते ठेकेदारों और अपनों की जेबें भरने के लिए टेंडर की शर्तों को मरोड़ा गया। इस कथित बंदरबांट पर भी विपक्षी पार्षदों ने उंगली तक नहीं उठाई।

* कागजों पर दौड़ती पाइप लाइन: वार्डों में घर-घर पानी पहुंचाने के लिए स्वीकृत हुई पाइप लाइन विस्तार योजना को लेकर भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग रहे हैं। शिकायतें हैं कि फाइलों में पाइप बिछाकर लाखों-करोड़ों की राशि का कथित आहरण कर लिया गया, जबकि धरातल पर आज भी कई वार्डों की जनता सूखी पाइप लाइनों को देखकर अपनी किस्मत को कोस रही है।

* जनता पी रही दूषित पानी, सड़कें बदहाल: नगर पालिका की कथित लापरवाही के कारण आज कटघोरा की जनता को गंदा और दूषित पानी सप्लाई किए जाने की शिकायतें आ रही हैं, जिससे पीलिया, डायरिया और पेट की गंभीर बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। वहीं, नगर की सड़कें जर्जर होकर गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं, जहां आए दिन राहगीर और बाइक सवार गिरकर चोटिल हो रहे हैं।

* वार्डों में गंदगी का साम्राज्य: स्वच्छता के कागजी दावों के विपरीत, कटघोरा के लगभग सभी वार्डों में कचरे का अंबार लगा होने के आरोप हैं। नियमित सफाई न होने से नालियां जाम हैं और मच्छर पनप रहे हैं। सफाई व्यवस्था के नाम पर हर महीने लाखों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस बदसूरत बनी हुई है।

जनता के भरोसे का सरेआम सौदा!
कटघोरा की सजग जनता अब खुद को पूरी तरह ठगा हुआ महसूस कर रही है। नागरिक यह तीखा सवाल पूछ रहे हैं कि जिन जनप्रतिनिधियों को उन्होंने अपने हक और नगर की सुरक्षा के लिए चुनकर सदन में भेजा था, वे खुद पालिका के कथित टुकड़ों पर क्यों पल रहे हैं? क्या चंद रुपयों के निजी ठेकों और कमीशन के आरोपों के बीच जनता के भरोसे का सौदा कर लेना सही है? अपनी 'निधि' बचाना और खुद के लिए 'ठेकेदारी' हासिल करना, जनता को मिल रहे दूषित पानी, गंदगी और बदहाल सड़कों के खिलाफ आवाज उठाने से ज्यादा जरूरी हो गया है?
विपक्ष की इस कथित लाचार और कायरतापूर्ण चुप्पी ने नगर पालिका प्रशासन और भ्रष्ट अधिकारियों के हौसलों को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। इस पूरे प्रकरण में निष्पक्षता के सिद्धांत के तहत नगर पालिका प्रशासन, सीएमओ और भाजपा के अधिकृत पदाधिकारियों का आधिकारिक पक्ष आना अभी बाकी है। अब देखना होगा कि इस चौतरफा बदहाली, कथित घोटालों और पार्षदों की इस आंतरिक 'डीलिंग' के आरोपों के उजागर होने के बाद क्या भाजपा का शीर्ष संगठन अपने इन चेहरों पर कोई कड़ा एक्शन लेता है, या कटघोरा की जनता इसी तरह प्रशासनिक तानाशाही और कथित भ्रष्टाचार की चक्की में पिसने के लिए मजबूर रहेगी।
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कोरबा कटघोरा
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