कोरबा और बिलासपुर रेंज पुलिस महकमे में महा-सर्जरी: : कबाड़ तस्करों से साठगांठ और पीड़ित के खर्च पर 'हवाई सैर' मामले में कटघोरा थाना प्रभारी समेत 8 पुलिसकर्मी सस्पेंड!
Shubh Arvind Sharma
Wed, Aug 19, 2026
कोरबा और बिलासपुर रेंज पुलिस महकमे में महा-सर्जरी: कबाड़ तस्करों से साठगांठ और पीड़ित के खर्च पर 'हवाई सैर' मामले में कटघोरा थाना प्रभारी समेत 8 पुलिसकर्मी सस्पेंड!
आईजी रामगोपाल गर्ग और एसपी सिद्धार्थ तिवारी का साझा चाबुक; आस्तीन के सांपों पर हुआ सीधे वज्रपात, थर-थर कांपा भ्रष्ट पुलिसकर्मियों का सिंडिकेट

कोरबा/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेंज और ऊर्जाधानी कोरबा पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता और पद के दुरुपयोग को लेकर अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा प्रशासनिक भूचाल आया है। कबाड़ तस्करों से सांठगांठ और एक प्रार्थी (पीड़ित) की जेब से हवाई यात्रा (फ्लाइट टिकट) कराने के गंभीर आरोपों के बाद बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) रामगोपाल गर्ग और कोरबा के कड़क पुलिस अधीक्षक (SP) सिद्धार्थ तिवारी ने संयुक्त रूप से कड़ा रुख अपनाते हुए कटघोरा थाने में ऐतिहासिक 'महा-सर्जरी' कर दी है। कर्तव्य की धज्जियां उड़ाने के आरोप में तत्कालीन कटघोरा थाना प्रभारी समेत कुल 8 पुलिसकर्मियों को दूध में से मक्खी की तरह निकालकर तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर लाइन हाजिर कर दिया गया है।
पहला कांड: कबाड़ का खेल और तस्करों से सांठगांठ
कोरबा जिला SECL, BALCO और NTPC जैसे बड़े उद्योगों का हब है, जिसके कारण यहाँ अरबों रुपये के स्क्रैप (लोहे, तांबे) को ठिकाने लगाने के लिए कबाड़ माफियाओं ने अपनी जड़ें पाताल तक फैला रखी हैं। अतीत में लोहे का पूरा पुल काट देने और खूनी गैंगवार जैसी वारदातों को अंजाम देने वाले इस शातिर माफिया को महकमे के कुछ जयचंदों का संरक्षण मिलता आ रहा था।
हाल ही में कटघोरा पुलिस ने मुखबिर की सटीक सूचना पर अवैध कबाड़ से लदे एक विशाल ट्रक को पकड़ा था। लेकिन कड़ा कानूनन शिकंजा कसने के बजाय थाने के जिम्मेदार अफसर और सिपाही तस्करों के साथ मोटी डील फिक्स करने और मलाई चाटने के खेल में मशगूल हो गए। जब तस्करों और पुलिस की इस जुगलबंदी की भनक सीधे एसपी सिद्धार्थ तिवारी की तीसरी आंख तक पहुंची, तो उन्होंने गोपनीय जांच बैठा दी, जिसमें चारों पुलिसकर्मियों के आचरण में घोर अनुशासनहीनता आईने की तरह साफ हो गई।
दूसरा कांड: पीड़ित की जेब से 'हवाई सैर' का उड़ाया मजा
इसी बीच कटघोरा पुलिस की साख पर बट्टा लगाने वाला एक और सनसनीखेज मामला सामने आया, जिसने खाकी को पूरी तरह शर्मसार कर दिया। एक मामले की विवेचना के दौरान 8 सदस्यीय इस पुलिस टीम ने विभागीय नियमों और मर्यादा को ठेंगे पर रखकर हवाई यात्रा (फ्लाइट) का आनंद लिया। कायदे से इस यात्रा का खर्च सरकारी मद या विभागीय प्रक्रिया से होना चाहिए था, लेकिन इन पुलिसकर्मियों ने बहती गंगा में हाथ धोते हुए इन फ्लाइट टिकटों का पूरा भुगतान प्रार्थी (पीड़ित) की ही जेब से करवा दिया। प्रार्थी के पैसों पर ऐश करने और पद का धौंस दिखाकर वित्तीय अनियमितता करने की यह गंभीर शिकायत जब बिलासपुर आईजी रामगोपाल गर्ग तक पहुंची, तो उन्होंने बिना पलक झपकाए निलंबन का हंटर चला दिया।
निलंबन की जद में आए पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों की सूची:
इस दोहरे भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के बड़े गठजोड़ पर कड़ा प्रहार करते हुए निम्नलिखित अधिकारियों/कर्मचारियों पर गाज गिरी है:
1. मोती पटेल (एमबी पटेल) — निरीक्षक एवं तत्कालीन थाना प्रभारी, कटघोरा (कप्तानी गंवाई)
2. राम पाण्डेय — उप निरीक्षक / सहायक उप निरीक्षक (प्रभारी अधिकारी)
3. गुनाराम सिन्हा — प्रधान आरक्षक (क्र. 381)
4. गोपाल यादव — प्रधान आरक्षक (क्र. 392)
5. राजेश कंवर — प्रधान आरक्षक (क्र. 35)
6. प्रदीप राठौर — आरक्षक (क्र. 747, थाना कटघोरा)
7. सुशील यादव — आरक्षक (क्र. 41, साइबर सेल)
8. प्रशांत सिंह — आरक्षक (क्र. 08, रक्षित केंद्र कोरबा)
इस कार्रवाई में आरक्षक पुष्पेंद्र कुर्रे और सुरेश तंवर का नाम भी शुरुआती कबाड़ कार्रवाई के दौरान संदेहास्पद आचरण में सुर्खियों में आया था।

सिक्के का दूसरा पहलू: बड़ी कार्रवाई या थाना प्रभारी को फंसाने की सोची-समझी साजिश?
एक तरफ जहाँ आईजी और एसपी की इस जुगलबंदी को अनुशासन का कड़ा पाठ माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर पुलिस गलियारों और आम जनता के बीच एक अलग ही चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। दबी जुबान में लोग इस पूरी कार्रवाई को तत्कालीन थाना प्रभारी के खिलाफ एक सोची-समझी साजिश और षड्यंत्र के रूप में भी देख रहे हैं।
* हाल ही में मिली थी जिम्मेदारी: गौरतलब है कि थाना प्रभारी को अभी हाल ही में कटघोरा थाने की कमान सौंपी गई थी। इतनी जल्दी बैक-टू-बैक विवादों में उनका नाम आ जाना कई सवालों को जन्म दे रहा है।
* शॉर्ट टर्म में बड़ी सफलताएं: इनका पिछला ट्रैक रिकॉर्ड बेहद बेदाग और शानदार रहा है। कटघोरा की जिम्मेदारी संभालते ही उन्होंने क्षेत्र के दो सबसे पेचीदा और हाई-प्रोफाइल मामलों को सुलझाकर अपनी काबिलियत साबित की थी:
1. छुरी राज ज्वेलर्स की अंधी लूट: पुलिस के लिए सिरदर्द बन चुकी राज ज्वेलर्स में हुई सनसनीखेज अंधी लूट की गुत्थी को उन्होंने बेहद कम समय में सुलझाकर आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा था।
2. डूमरमुड़ा का अंधा कत्ल: डूमरमुड़ा में हुए अंधे कत्ल की उलझी हुई कड़ियों को जोड़कर कातिलों को बेनकाब करने में इन्होंने मुख्य भूमिका निभाई थी, जिसकी चहुंओर तारीफ हुई थी।
* किसे खटक रही थी जांबाजी?: ऐसे काबिल और ताबड़तोड़ नतीजे देने वाले अधिकारी के खिलाफ इतनी अचानक और बड़ी कार्रवाई होना, इस बात का इशारा करती है कि क्या कबाड़ माफिया या महकमे के ही कुछ ईर्ष्यालु तत्वों ने थाना प्रभारी को लूपलाइन में धकेलने के लिए यह जाल बुना था? चर्चा है कि उनके बढ़ते कद और सख्त तेवरों से परेशान होकर विरोधियों ने उन्हें बलि का बकरा बना दिया।
अपराधियों और भ्रष्टाचारियों की 'खैर नहीं'
इस ताबड़तोड़ संयुक्त प्रशासनिक सर्जरी से आईजी रामगोपाल गर्ग और एसपी सिद्धार्थ तिवारी ने जिले के चप्पे-चप्पे पर तैनात पुलिसकर्मियों को लोहे के चने चबाने जैसी कड़ी चेतावनी दे दी है। उन्होंने साफ कर दिया है कि अगर कोई भी वर्दीवाला अपराधियों को संरक्षण देगा, पीड़ितों का शोषण करेगा या अनुशासन तोड़ेगा, तो उसका निशान मिटा दिया जाएगा। कोरबा और बिलासपुर रेंज में अमन-चैन और निष्पक्ष कानून व्यवस्था स्थापित करने के लिए पुलिस कप्तानों की यह आक्रामक शैली आज जनता के बीच खूब सुर्खियां बटोर रही है।
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