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जनता के लिए सबसे बड़ी चेतावनी—जाग जाओ कटघोरा वासियों, वरना ये 'भोले-भाले' दिखने वाले भ्रष्टाचारी शहर को नरक बना देंगे!

नगर पालिका में भ्रष्टाचार का बड़ा सिंडिकेट! पानी के लिए तरस रही जनता, पाइपलाइन विस्तार का खुलेगा राज

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कटघोरा पाइपलाइन घोटाला: अब सीधे निशाने पर CMO की कार्यशैली! : जनता के लिए सबसे बड़ी चेतावनी—जाग जाओ कटघोरा वासियों, वरना ये 'भोले-भाले' दिखने वाले भ्रष्टाचारी शहर को नरक बना देंगे!

Shubh Arvind Sharma

Tue, Aug 18, 2026

कटघोरा पाइपलाइन घोटाला: अब सीधे निशाने पर CMO की कार्यशैली! जनता के लिए सबसे बड़ी चेतावनी—जाग जाओ कटघोरा वासियों, वरना ये 'भोले-भाले' दिखने वाले भ्रष्टाचारी शहर को नरक बना देंगे!

कटघोरा (खोजी न्यूज़ डेस्क)।कटघोरा नगरपालिका परिषद में पीने के पानी के नाम पर हुए ₹1.11 करोड़ के कथित पाइपलाइन घोटाले की गूंज अब शांत होने का नाम नहीं ले रही है। सजग नागरिक अनिल अग्रवाल की पीएमओ (PMO) और मुख्यमंत्री तक पहुंची शिकायत, बिलासपुर की जांच टीम का दौरा, और उसके बाद मौजूदा वार्ड पार्षद द्वारा "PHE की पुरानी पाइपलाइन को नया दिखाने" के सनसनीखेज खुलासे ने इस पूरे मामले को छत्तीसगढ़ का सबसे चर्चित प्रशासनिक विवाद बना दिया है।

लेकिन अब, इस पूरे कथित सिंडिकेट के मुखिया यानी नगरपालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) की कार्यशैली और भूमिका को लेकर गंभीर सवाल तैरने लगे हैं। इसके साथ ही, अब शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और प्रताड़ित जनता के सब्र का बांध भी टूट चुका है। अब यह लड़ाई सिर्फ कागजी शिकायतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सीधे जन-आंदोलन और जनता की चेतना की तरफ बढ़ रही है।

आइए बहुत ही आसान शब्दों में समझते हैं कि इस पूरे महा-खेल में CMO की भूमिका पर उंगलियां क्यों उठ रही हैं और क्यों अब कटघोरा की जनता के लिए जागने का आखिरी समय आ गया है।

कटघोरा वासियों के लिए सबसे बड़ी चेतावनी: अब नहीं जागे तो नरक बन जाएगा शहर!

कटघोरा की आम जनता को अब इस कड़वे सच को बहुत ही गहराई से समझना होगा:

* विकास नहीं, सिर्फ पैसों की लूट: नगरपालिका के बंद कमरों में जो योजनाएं बनती हैं, वे आपके वार्ड के विकास के लिए नहीं, बल्कि जनता की गाढ़ी कमाई के टैक्स के पैसों की जमकर लूट मचाने के लिए बनाई जा रही हैं?

* रोज का जलसंकट, करोड़ों का बजट: शहर की माताएं-बहनें आए दिन पानी जैसी मूलभूत और बेहद जरूरी समस्या से जूझ रही हैं, टैंकरों के पीछे लाइन लगा रही हैं। दूसरी तरफ, साहब लोग कागजों पर करोड़ों की पाइपलाइन बिछाकर जनता के हक पर खुलेआम डकैती डाल रहे हैं?

* 'भोले-भाले' चेहरों का खतरनाक सच: कटघोरा की जनता अब आपस में चर्चा कर रही है कि एसी कमरों में बैठकर बेहद 'भोले-भाले और सीधे' दिखने वाले ये भ्रष्टाचारी अधिकारी और ठेकेदार अंदर से कितने शातिर हैं। अगर आज भी कटघोरा की जनता चुप रही, अपने हक के लिए सड़कों पर नहीं उतरी और सोती रही, तो ये सफेदपोश भ्रष्टाचारी हमारे प्यारे और शांत कटघोरा शहर को पूरी तरह से नरक में धकेल देंगे!

CMO की कार्यशैली पर खड़े हुए ये 4 सबसे बड़े और तीखे सवाल!

एक मुख्य प्रशासनिक अधिकारी होने के नाते पूरे शहर के विकास की जिम्मेदारी CMO की होती है। लेकिन इस मामले में उनके द्वारा उठाए गए कदम कई गंभीर संदेहों को जन्म देते हैं:

1. फर्जी भुगतान पर आंखें मूंदने का आरोप क्यों?: टेंडर कॉपी के अनुसार, जब वार्ड 1 से 15 तक के विभिन्न हिस्सों में पाइपलाइन विस्तार के लिए ₹1.11 करोड़ की भारी-भरकम राशि जारी की गई, तो क्या साहब ने एक बार भी दफ्तर से बाहर निकलकर जमीन पर काम चेक नहीं किया? बिना भौतिक सत्यापन के ठेकेदारों को फाइनल पेमेंट की फाइल पर साइन कैसे हो गए?

2. शिकायत के बाद 'देर आए, पर अंधेर लाए' वाली खुदाई क्यों?: जैसे ही मामले की शिकायत उच्च स्तर पर हुई, वैसे ही रातों-रात सड़कों पर जेसीबी (JCB) मशीनें उतार दी गईं। जनता पूछ रही है कि जब कागजों पर काम पहले ही पूरा दिखाकर पैसा निकाला जा चुका था, तो अचानक यह नई खुदाई किसके आदेश पर शुरू हुई? क्या CMO को इस लीपापोती की भनक नहीं थी?

3. PHE के काम को अपना बताने पर चुप्पी क्यों?: वार्ड पार्षद ने खुलेआम आरोप लगाया है कि जमीन के नीचे दबी पाइपलाइन लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) की है, नगरपालिका की नहीं। इस सीधे और गंभीर तकनीकी आरोप पर कटघोरा CMO ने अब तक अपनी चुप्पी क्यों नहीं तोड़ी है? उनकी यह रहस्यमयी खामोशी क्या किसी बड़ी कमजोरी की तरफ इशारा करती है?

4. अखबारों में विज्ञापन का ढोंग किसके लिए?: अखबारों में बाकायदा विज्ञापन देकर टेंडर प्रक्रिया (अंतिम तिथि 03/02/2025) की कानूनी आड़ ली गई। आरोप है कि यह पूरी कवायद सिर्फ इसलिए की गई ताकि ऊपरी तौर पर सब कुछ पारदर्शी और कानूनी दिखे, जबकि जमीन पर सारा खेल कथित सिंडिकेट के इशारे पर फाइलों के अंदर ही निपटा दिया गया।

क्या इस बार भ्रष्टाचार के चक्रव्यूह से बच पाएंगे 'साहब'?

कटघोरा के गलियारों में अब सबसे बड़ी चर्चा यही है कि क्या हमेशा की तरह इस बार भी बड़ी मछलियों को बचा लिया जाएगा? लेकिन इस बार परिस्थितियां साहब के अनुकूल नहीं दिख रही हैं:

* पार्षद का अंदरूनी कबूलनामा: जब संस्था के भीतर का ही एक माननीय जनप्रतिनिधि (पार्षद) सिंडिकेट की पोल खोल रहा हो और 14 प्रस्तावित कार्य स्थलों की सूची (जिसमें शिव मेडिकल से ब्रम्हाकुमारी आश्रम और गोकुल तिवारी घर से अहिरन नदी तक के मार्ग दर्ज हैं) सार्वजनिक हो चुकी हो, तो बहाने बनाना नामुमकिन हो जाता है।

* उच्च स्तरीय रडार: मामला चूंकि सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और मुख्यमंत्री की चौखट तक पहुंच चुका है, इसलिए बिलासपुर की जांच टीम अगर कोई कमज़ोर या लीपापोती वाली रिपोर्ट बनाती भी है, तो उस रिपोर्ट की दोबारा फोरेंसिक जांच होने का खतरा बना हुआ है। क्या बिलासपुर की जांच टीम की ढाल के पीछे 'साहब' एक बार फिर सुरक्षित बच निकलेंगे या इस बार कानून का शिकंजा कस कर रहेगा?

₹57 लाख के क्लोरीनीकरण की फाइल भी खोलेगी राज!

जानकार बताते हैं कि पाइपलाइन के इस विवाद में फंसे CMO के लिए इसी टेंडर के साथ जुड़ा ₹57.33 लाख का बोरवेल क्लोरीनीकरण कार्य भी गले की हड्डी बनने वाला है। जब बुनियादी पाइपलाइन ही पूरी तरह आरोपों के घेरे में आ चुकी है, तो पानी साफ करने की दवा के नाम पर निकाले गए इस बजट का हिसाब देना भी साहब के लिए टेढ़ी खीर साबित होगा।

साहब.! जनता की प्यास का हिसाब तो देना होगा

नगरपालिका का CMO कोई साधारण पद नहीं होता, यह जनता के पैसों और उनके विश्वास का रक्षक होता है। लेकिन कटघोरा में जो तस्वीरें और दस्तावेज सामने आ रहे हैं, वे चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे हैं कि जनता मूलभूत सुविधाओं से वंचित क्यों है—क्योंकि रक्षक ही कथित तौर पर भक्षक की भूमिका में नजर आ रहे हैं।

हमारा सीधा सवाल: जिला प्रशासन कोरबा और नगरीय प्रशासन मंत्रालय के उच्च अधिकारी इस पूरे कथित महा-खेल पर कटघोरा CMO को तत्काल निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय और कानूनी जांच कब शुरू करेंगे? क्या जनता की गाढ़ी कमाई डकारने वाले इन सफेदपोशों पर आपराधिक एफआईआर (FIR) दर्ज होगी?

कटघोरा के प्रबुद्ध नागरिकों, क्या आपको लगता है कि अब समय आ गया है जब हमें अपने हक की पानी की बूंद-बूंद के लिए इन भ्रष्टाचारियों के खिलाफ सड़क पर उतरना होगा? अपने हक का जवाब मांगे और भ्रष्टाचार का विरोध करे,ताकि भ्रष्टाचार पर लगाम लग सके और आप अपना हक पा सके।

शेष अगले अंक में.....

Tags :

कोरबा कटघोरा

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