कटघोरा में दीपोत्सव का महाउल्लास: : बाजारों में उमड़ा जनसैलाब, शाम 5:43 बजे से महालक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त
Shubh Arvind Sharma
Sun, Nov 8, 2026
कटघोरा में दीपोत्सव का महाउल्लास: बाजारों में उमड़ा जनसैलाब, शाम 5:43 बजे से महालक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त

कटघोरा (कोरबा), 8 नवंबर 2026। दीपों के पावन पर्व दीपावली के अवसर पर आज कटघोरा अंचल पूरी तरह उत्सव और उमंग के रंग में रंगा नजर आ रहा है। सुबह से ही नगर के मुख्य बाजारों में खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ी हुई है। वहीं, आज शाम 5:43 बजे से रात्रि 7:41 बजे तक प्रदोष काल में महालक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा।

मुख्य झलकियां
• स्वदेशी उत्पादों की बढ़ी मांग. इस बार कटघोरा के बाजारों में चीनी सजावटी सामानों के बजाय स्थानीय कुम्हारों के माटी के दीये, गोबर से बने कलात्मक दीपक और धान की बालियों से बनी झालरों की जमकर बिक्री हो रही है। इससे ग्रामीण कारीगरों और स्थानीय व्यापारियों में खासा उत्साह है।
• सराफा और मिष्ठान प्रतिष्ठानों पर रौनक. चांदी के भावों में नरमी के चलते सराफा बाजार में पूजन के सिक्कों और पारंपरिक आभूषणों की अच्छी मांग देखी जा रही है। इसके साथ ही मिठाई, पुष्प, पूजन सामग्री और आतिशबाजी की दुकानों पर सुबह से ही ग्राहकों की कतारें लगी हुई हैं।

• पुलिस प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था. त्योहारी भीड़ और यातायात को सुचारु रखने के लिए कटघोरा पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है। प्रमुख चौराहों और बाजार क्षेत्रों में पुलिस जवान लगातार पैदल गश्त कर रहे हैं।
• सामाजिक संस्थाओं की सराहनीय पहल. नगर के प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने वनांचल व दूरस्थ ग्रामों के जरूरतमंद परिवारों के बीच दीप, मिष्ठान और वस्त्र वितरित कर दीपावली की खुशियां साझा की हैं।

कटघोरा में लक्ष्मी पूजन के प्रमुख मुहूर्त
• प्रदोष काल (सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त). स्थानीय सूर्यास्त के अनुसार शाम 5:43 बजे से रात 7:41 बजे तक महालक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन अत्यंत शुभ रहेगा।
• वृषभ लग्न (स्थिर लग्न). घर-परिवार में स्थायी सुख-समृद्धि के लिए शाम 6:15 बजे से रात 8:11 बजे तक स्थिर वृषभ लग्न में पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है।
• महानिशीथ काल. विशेष साधना और रात्रिकालीन अनुष्ठान के लिए रात 11:56 बजे से 12:48 बजे तक का समय निर्धारित है।
संक्षिप्त पूजन विधि
• चौकी एवं कलश स्थापना. पूजा स्थल को स्वच्छ कर चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और अक्षत के आसन पर श्रीगणेश व माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। समीप ही जल से भरा कलश रखकर शुद्ध घी का अखंड दीपक प्रज्वलित करें।
• अर्चना और दीपदान. सर्वप्रथम भगवान गणेश की वंदना करें, फिर माता लक्ष्मी को रोली, अक्षत, कमल पुष्प, खील-बताशे और मिष्ठान अर्पित करें। अंत में सपरिवार आरती कर घर के आंगन और मुख्य द्वार पर दीपमाला सजाएं।
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