कटघोरा में आंगनबाड़ी कर्मियों का हल्लाबोल: : एक दिवसीय धरना देकर मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, नियमितीकरण और ₹30,000 मानदेय की मांग
Shubh Arvind Sharma
Tue, Oct 27, 2026
कटघोरा में आंगनबाड़ी कर्मियों का हल्लाबोल: एक दिवसीय धरना देकर मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, नियमितीकरण और ₹30,000 मानदेय की मांग
कटघोरा:क्षेत्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आज कटघोरा में एक दिवसीय जंगी धरना प्रदर्शन किया। 'आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संयुक्त मंच, छत्तीसगढ़' के आह्वान पर आयोजित इस प्रदर्शन में भारी संख्या में महिला कर्मी शामिल हुईं। धरना स्थल पर अपनी आवाज बुलंद करने के बाद आंदोलनकारियों ने अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) के माध्यम से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के नाम एक संयुक्त मांग पत्र सौंपा।
संयुक्त मंच की प्रांतीय पदाधिकारियों (श्रीमती कविता यादव, श्रीमती रुखमणी सज्जन, श्रीमती सुधा रात्रे, श्रीमती हेमा भारती, श्रीमती कल्पना चंद और श्रीमती अमिता नायक) के दिशा-निर्देशन में आयोजित इस स्थानीय प्रदर्शन में वक्ताओं ने शासन की नीतियों पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। आंदोलनकारियों ने कहा कि बुनियादी स्वास्थ्य और पोषण की जिम्मेदारी उठाने वाली इन महिला कर्मियों को आजादी के दशकों बाद भी उनके मूलभूत श्रम अधिकारों और न्यायोचित सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है।

आंदोलन के जरिए बुलंद की गईं ये 5 मुख्य मांगें:
• नियमितीकरण व सम्मानजनक आजीविका: सभी आंगनबाड़ी कर्मियों का शासकीयकरण किया जाए। वर्तमान श्रम नियमों के तहत कार्यकर्ताओं को ₹30,000 और सहायिकाओं को ₹25,500 मासिक मानदेय दिया जाए।
• सीधी पदोन्नति की मांग: कार्यकर्ताओं को सुपरवाइजर के पद पर और सहायिकाओं को कार्यकर्ता के पद पर सीधे पदोन्नत किया जाए। संगठन ने मांग की है कि इस प्रक्रिया से उम्र का बंधन पूरी तरह समाप्त हो।
• सामाजिक और भविष्य की सुरक्षा: सभी कार्यरत कर्मियों को समूह बीमा, पेंशन, ग्रेच्युटी और भविष्य निधि (PF) का वैधानिक लाभ दिया जाए ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।
• अनुकंपा नियुक्ति व अनुग्रह राशि: सेवाकाल के दौरान आकस्मिक मृत्यु होने पर आश्रितों को तुरंत अनुकंपा नियुक्ति मिले। साथ ही कार्यकर्ताओं के परिवार को ₹5 लाख और सहायिकाओं के परिजनों को ₹3 लाख की तत्कालिक सहायता या रिटायरमेंट लाभ मिले।
• वार्षिक मानदेय वृद्धि: मध्य प्रदेश सरकार की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में हर साल ₹1,000 की अनिवार्य वृद्धि की जाए।

अतिरिक्त काम के बोझ और महंगाई से त्रस्त हैं कर्मी
धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए स्थानीय पदाधिकारियों ने कहा कि इस कमरतोड़ महंगाई के दौर में बेहद मामूली मानदेय पर गुजारा करना असंभव हो गया है। इसके ऊपर से मूल विभागीय दायित्वों के अलावा अन्य शासकीय सर्वे और अतिरिक्त कार्यों का बोझ लाद दिया जाता है, जिससे कर्मियों में भारी मानसिक और आर्थिक तनाव है।
कटघोरा में हुए इस एक दिवसीय प्रभावी प्रदर्शन के माध्यम से संयुक्त मंच ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी इन न्यायोचित और बहुप्रतीक्षित मांगों पर शीघ्र ही सहानुभूतिपूर्वक ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप अख्तियार करेगा।
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