कटघोरा नगरपालिका में 'भ्रष्टाचार का ट्रांसफर': : महाभ्रष्ट CMO गया तो अब बेलगाम इंजीनियरों ने संभाली कमान, IAS अधिकारी की नाक तले ठेकेदार व इंजीनियरों की खुली भर्राशाही!
Shubh Arvind Sharma
Mon, Oct 26, 2026
कटघोरा नगरपालिका में 'भ्रष्टाचार का ट्रांसफर': महाभ्रष्ट CMO गया तो अब बेलगाम इंजीनियरों ने संभाली कमान, IAS अधिकारी की नाक तले ठेकेदार व इंजीनियरों की खुली भर्राशाही!
कटघोरा (कोरबा)। कटघोरा नगर पालिका परिषद में भ्रष्टाचार का खेल किस कदर बेलगाम हो चुका है, इसका अंदाजा पुछापारा में बन रही सीसी सड़क के घटिया निर्माण से साफ लगाया जा सकता है। नगर पालिका में नेतृत्व बदला, प्रशासनिक ढर्रा बदलने के दावे हुए, लेकिन लूट का पुराना खेल आज भी बदस्तूर जारी है। एक महाभ्रष्ट पूर्व सीएमओ (CMO) की विदाई के बाद शहर को उम्मीद थी कि अब व्यवस्था सुधरेगी, लेकिन यहाँ तो इंजीनियरों ने खुद को नियमों से ऊपर समझ लिया है। हैरानी की बात यह है कि नगर पालिका की कमान अब एक सख्त और ईमानदार छवि वाले नए आईएएस (IAS) अधिकारी के हाथों में है, लेकिन उनकी नाक के ठीक नीचे इंजीनियर और ठेकेदार का गठजोड़ खुलेआम शासकीय धन की डकैती डाल रहा है। जनता हैरान है कि आखिर एक आईएएस अधिकारी की मौजूदगी के बावजूद इन भ्रष्टाचारियों की इतनी हिम्मत कहाँ से आ रही है जो वे बिना किसी खौफ के घटिया काम को अंजाम दे रहे हैं?

पुछापारा की सड़क इस प्रशासनिक लाचारी और ठेकेदार-इंजीनियर की जुगलबंदी का जीता-जागता सबूत बन चुकी है।

आईएएस (IAS) की साख को चुनौती देते इंजीनियर बाबू!
कटघोरा की जनता अभी पूर्व सीएमओ मुद्रिका प्रसाद तिवारी के कार्यकाल के काले कारनामों और वित्तीय अनियमितताओं के जख्मों से उबर भी नहीं पाई थी कि अब सब-इंजीनियरों ने अपनी जेबें गर्म करने का नया मोर्चा खोल दिया है। जब एक जागरूक नागरिक प्रमोद नायडू ने पुछापारा की सड़क के बेस में सिर्फ रेत ही रेत दिखने और तकनीकी मानकों की धज्जियां उड़ाने की गंभीर शिकायत की, तो संबंधित इंजीनियर ने अपनी कर्तव्यनिष्ठा दिखाने के बजाय एक ऐसा हास्यास्पद और शर्मनाक तर्क दे डाला जिससे उनकी नीयत साफ उजागर हो गई। इंजीनियर साहब का कहना है कि "पानी गिरने के कारण बेस में रेत दिखाई दे रही है।"

सवालों से भागे इंजीनियर साहब, फोन उठाना भी नहीं समझा लाज़मी!
हद तो तब हो गई जब इस गंभीर और संवेदनशील मामले पर जब खुद मीडिया और सजग नागरिकों ने इंजीनियर साहब से उनका पक्ष जानने और तकनीकी जानकारी लेने का प्रयास किया, तो उन्होंने फोन उठाना तक लाज़मी नहीं समझा। सच का सामना करने के बजाय बार-बार बजती घंटी को नजरअंदाज करना यह साफ दर्शाता है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है! जब नीयत साफ हो तो अधिकारी सीना तानकर जवाब देते हैं, लेकिन जब भ्रष्टाचार का कीचड़ पैर तक आ पहुंचा हो, तो ऐसे ही फोन बंद कर या कॉल डिस्कनेक्ट कर भागा जाता है। जनता पूछ रही है कि इंजीनियर साहब, आखिर इस चुप्पी के पीछे का राज क्या है?

जनता का तीखा प्रहार: इंजीनियर साहब! एक आईएएस अधिकारी की कमान में काम करते हुए भी आपको ऐसा लचर और बचकाना बहाना बनाते हुए शर्म नहीं आई? बिना बरसात के मौसम में पानी गिरने की दलील देकर आप किसे बेवकूफ बना रहे हैं? यह घटिया सफाई और अब यह रहस्यमयी चुप्पी साफ बयां करती है कि भ्रष्ट तंत्र को नए प्रशासनिक मुखिया के हंटर का रत्ती भर भी खौफ नहीं है। जो कमीशन पहले ऊपर तक जाता था, उसे अब नीचे ही बंदरबांट कर ठिकाने लगाने का दुस्साहस किया जा रहा है।

ठेकेदार की चाटुकारिता या कमीशनखोरी का नया नेक्सस?
एक सरकारी तकनीकी अधिकारी का दायित्व ठेकेदार के काम की कड़ी निगरानी करना और खामी मिलने पर उसे ब्लैकलिस्ट करना होता है। लेकिन कटघोरा में गंगा उल्टी बह रही है। यहाँ अधिकारी अपनी सरकारी शपथ को भूलकर सिर्फ ठेकेदार की तिजोरी भरने और उसकी घटिया निर्माण सामग्री पर तकनीकी मुहर लगाने में दिन-रात एक किए हुए हैं।
यदि सड़क का आधार (बेस) ही बालू के ढेर पर टिका है, तो जनता के टैक्स के लाखों रुपये से बनने वाली यह सीसी सड़क चंद महीनों में ही मलबे में तब्दील हो जाएगी। यह सीधे तौर पर एक ईमानदार आईएएस प्रशासन की साख पर बट्टा लगाने की साजिश है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

नवोदित आईएएस (IAS) से जनता की न्याय की गुहार, अब आर-पार की लड़ाई!
पूर्व सीएमओ के जाने के बाद नगर पालिका की निगरानी व्यवस्था को इन इंजीनियरों ने पूरी तरह पंगु बना दिया है। नए आईएएस अधिकारी की कार्यशैली पर भरोसा जताते हुए अब कटघोरा की जागरूक जनता इस भर्राशाही के खिलाफ लामबंद हो रही है।
शहर की स्पष्ट और पुरजोर मांगें:
• आईएएस की हनक दिखे, इंजीनियर का निलंबन हो: ठेकेदार के वकील बनकर घूम रहे और जनता व मीडिया के फोन से दुबकने वाले इस इंजीनियर को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए ताकि निष्पक्ष तकनीकी जांच प्रभावित न हो सके।
• उच्च स्तरीय तकनीकी टीम से लैब टेस्टिंग: सड़क के बेस की मोटाई और उसमें प्रयुक्त घटिया सामग्री के सैंपल जिला प्रशासन या राज्य स्तरीय लैब में जांच के लिए भेजे जाएं।
• भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत एफआईआर: शासकीय राशि का खुला गबन करने वाले इंजीनियर और ठेकेदार के इस नापाक गठजोड़ पर तत्काल निष्पक्ष जांच कर कठोर कार्यवाही की जाए।
कटघोरा की जनता अब मूकदर्शक बनकर अपने हक की कमाई को लुटते नहीं देखेगी। नए आईएएस अधिकारी को अब कड़ा रुख अख्तियार करना होगा और यह साबित करना होगा कि कटघोरा में कानून का राज है, न कि भ्रष्टाचार में डूबे बेलगाम इंजीनियरों और ठेकेदारों की मनमानी का!
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