अटल प्रतिमा' महाघोटाला: : चिराग तले घोर अंधेरा! अपनों ने ही लगाई लंका में आग, भाजपा के युवा 'पेटी ठेकेदार' की करतूत से संगठन पूरी तरह लाचार!
Shubh Arvind Sharma
Sun, Aug 9, 2026
'अटल प्रतिमा' महाघोटाला: चिराग तले घोर अंधेरा! अपनों ने ही लगाई लंका में आग, भाजपा के युवा 'पेटी ठेकेदार' की करतूत से संगठन पूरी तरह लाचार!
कटघोरा (कोरबा)। कटघोरा नगर पालिका परिषद के 'अटल परिसर' में स्थापित भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा में हुए महाघोटाले की परतें जैसे ही खुलीं, सियासत के गलियारों में भूचाल आ गया। सूत्रों से छनकर आई कड़वी सच्चाई ने पूरी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को काटो तो खून नहीं वाली स्थिति में ला खड़ा किया है। इस पूरे भ्रष्टाचार की पटकथा किसी बाहरी ने नहीं, बल्कि घर के भेदियों ने ही लिखी है। मुख्य ठेकेदार से साँठगाँठ कर इस पूरे काम को पर्दे के पीछे से पेटी ठेके (सब-कॉन्ट्रैक्ट) पर भाजपा युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष अनुराग दुहलानी ने हथिया लिया था।

इन जिम्मेदार पदाधिकारियों ने बहती गंगा में इस कदर हाथ धोया कि साख और सुशासन के दावों की सरेआम धज्जियां उड़ गईं। अब जब इस करतूत की पोल खुल चुकी है, तो संगठन के भीतर सिर पीटकर एक ही विलाप गूंज रहा है—"दुश्मनों से तो लोहा ले लेते, पर यहाँ तो आस्तीन के सांपों ने ही घर में सेंध लगा दी!"
पहली ही बारिश ने धोया भ्रष्टाचार का रंग, उड़ गए तोते!
कागजों और टेंडर के नियमों के मुताबिक, अटल परिसर में लगभग 14 लाख रुपये की मोटी रकम से शुद्ध ब्रॉन्ज (कांस्य) की भव्य प्रतिमा चमकानी थी। लेकिन रसूखदार भाजपा युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष अनुराग दुहलानी ने अंधा बांटे रेवड़ी, फिर-फिर अपनों को दे की तर्ज पर इस काम में जमकर लीपापोती की। चांदी काटने के चक्कर में ब्रॉन्ज के बजट को पूरी तरह डकार लिया गया और जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए सीमेंट-कंक्रीट की सस्ती मूर्ति खड़ी कर उस पर केवल धात्विक रंग पोत दिया गया। लेकिन पाप का घड़ा फूटकर ही रहता है; पहली ही मानसूनी बारिश ने सारा नकली रंग धो डाला और कंक्रीट का ढांचा बाहर आते ही नेताओं और अधिकारियों के तोते उड़ गए।
सांप-छछूंदर की गति में फंसा स्थानीय नेतृत्व, 'अब करें तो क्या करें?'
पार्टी के ही मुख्य और कद्दावर पदाधिकारी का नाम सीधे तौर पर इस घिनौने घालमेल में सामने आने से भाजपा पूरी तरह बैकफुट पर है। स्थानीय संगठन की हालत इस समय सांप-छछूंदर जैसी गति की हो गई है। यदि वे अपने इस दागदार पदाधिकारी की पीठ थपथपाते हैं, तो जनता थू-थू करेगी; और यदि उन पर गाज गिराते हैं, तो घर की फूट सरेआम चौराहे पर आ जाएगी। 'अब करें तो क्या करें' के फेर में फंसा नेतृत्व पूरी तरह लाचार और रक्षात्मक मुद्रा में नजर आ रहा है। चंद रुपयों के लालच में अनुराग दुहलानी की इस सेंधमारी ने आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से ठीक पहले पार्टी की लुटिया डुबोने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
घड़ियाली आंसू बहाना बंद करे प्रशासन, अब आर-पार की लड़ाई!
विपक्ष ने भी इस मुद्दे को हाथों-हाथ लपकते हुए भाजपा के सुशासन के दावों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। युवा कांग्रेस और आक्रोशित नागरिकों ने सड़क पर मोर्चा खोलते हुए इसे देश के सबसे सम्मानित नेता का 'अटल अपमान' करार दिया है। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर गाज गिराकर घड़ियाली आंसू बहाने से काम नहीं चलेगा। जब तक पर्दे के पीछे खेल करने वाले इस रसूखदार भाजपा नेता यानी अनुराग दुहलानी के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्यवाही व FIR नही होती,तब तक यह यह मामला थमने वाला नहीं है।
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