कटघोरा नगर पालिका में ‘अंधा बांटे रेवड़ी’ का खेल: : भाजपा नेता टीकम पाल ने खोला मोर्चा, सरगबन्द तालाब टेंडर में 'खास'को फायदा पहुंचाने के लिए शासन को लगाया 20 लाख का चूना!
Shubh Arvind Sharma
Tue, Aug 4, 2026
कटघोरा नगर पालिका में ‘अंधा बांटे रेवड़ी’ का खेल: भाजपा नेता टीकम पाल ने खोला मोर्चा, सरगबन्द तालाब टेंडर में 'खास'को फायदा पहुंचाने के लिए शासन को लगाया 20 लाख का चूना!

कटघोरा (कोरबा)। नगर पालिका परिषद कटघोरा में भ्रष्टाचार के दीमक ने किस कदर सरकारी खजाने को खोखला करना शुरू कर दिया है, इसका एक और 'जिंदा सुबूत' सामने आया है। वार्ड क्रमांक 4 के सरगबन्द तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य की निविदा (टेंडर) प्रक्रिया में अधिकारियों ने अपनी जेबें गर्म करने के लिए नियमों की जमकर 'धज्जियां उड़ाई' हैं। इस 'अंधेर नगरी चौपट राजा' जैसे खेल के खिलाफ भाजपा अ.जा. मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष टीकम पाल ने मोर्चा खोलते हुए सीधे कोरबा कलेक्टर की चौखट पर दस्तक दी है और पूरी निविदा को निरस्त कर 'दूध का दूध और पानी का पानी' करने की मांग की है।
जब घी सीधी उंगली से न निकला, तो उंगली टेढ़ी कर ली!
मामला अधोसंरचना मद से स्वीकृत लगभग 50 लाख 77 हजार रुपये के भारी-भरकम बजट का है। सूत्रों के मुताबिक, पहली बार जब टेंडर खुला तो करीब 15 ठेकेदारों ने दांव लगाया था। मुकाबला इतना कड़ा था कि दो ठेकेदारों के भाव बिल्कुल एक समान (टाई) आ गए। नियम कहते हैं कि ऐसी स्थिति में लॉटरी निकालकर फैसला होना चाहिए, लेकिन मुख्य नगर पालिका अधिकारी मुद्रिका प्रसाद तिवारी (CMO) को तो 'अपना उल्लू सीधा' करना था। उन्होंने आव देखा न ताव, नियम-कायदों को ताक पर रखकर पूरी निविदा प्रक्रिया को ही 'ठंडे बस्ते' में डाल दिया यानी रद्द कर दिया।
पीठ पीछे ‘अंधा बांटे रेवड़ी, फिर-फिर अपनों को दे’
इसके बाद जो खेल हुआ, उसने नगर पालिका की कार्यप्रणाली के 'कफन से पर्दा' उठा दिया। दूसरी बार आनन-फानन में टेंडर बुलाया गया, जिसमें 7 ठेकेदार शामिल हुए। अब अपने चहेते ठेकेदार की 'चांदी काटने' के लिए अधिकारियों ने ऐसा चक्रव्यूह रचा कि बाकी 6 ठेकेदारों के टेंडर फॉर्म को बिना खोले ही दरकिनार कर दिया गया और एकल खिड़की की तरह अपने पसंदीदा ठेकेदार की झोली में काम डाल दिया गया।
'घर का जोगी जोगड़ा, आन गांव का सिद्ध' – शासन को लगा 20 लाख का चूना!
हैरानी की बात यह है कि पहली प्रक्रिया में ठेकेदार इस काम को 25 फीसदी बिलो (कम दाम) पर करने को तैयार थे, लेकिन अधिकारियों की 'साठगांठ' के चलते दूसरी बार में इसी काम को 5 फीसदी अबोव (ज्यादा दाम) पर स्वीकृत कर दिया गया। इस 'शकुनि की चाल' के कारण सरकारी खजाने को सीधे-सीधे 18 से 20 लाख रुपये का 'गहरा घाव' लगा है। जनता के टैक्स की कमाई पर इस तरह डाका डालने वाले 'सफेदपोशों' के खिलाफ अब भाजपा नेता ने सीधे आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। देखना होगा कि कलेक्टर इस 'घपलेबाजी के जाल' को काटते हैं या फिर भ्रष्टाचारियों की 'पांचों उंगलियां घी में' ही रहेंगी।
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