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ग्रामीणों ने उठाए वन विभाग पर सवाल: : पसान वनपरिक्षेत्र में पुराने रतनजोत पौधों को काटने पर नाराजगी, डीएफओ बोले- "शिकायत मिलने पर होगी जांच"

Shubh Arvind Sharma

Sat, Jul 18, 2026

ग्रामीणों ने उठाए वन विभाग पर सवाल: पसान वनपरिक्षेत्र में पुराने रतनजोत पौधों को काटने पर नाराजगी, डीएफओ बोले- "शिकायत मिलने पर होगी जांच"

कटघोरा/बिलासपुर।कटघोरा वनमंडल के पसान परिक्षेत्र में वन विभाग द्वारा की जा रही एक कार्रवाई पर स्थानीय ग्रामीणों ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। ग्रामीणों ने मुख्य वन संरक्षक (CCF), बिलासपुर सर्किल को पत्र लिखकर पसान रेंज में रतनजोत के उपयोगी पौधों को उखाड़ने और काटने की शिकायत की है। वहीं दूसरी ओर, इस पूरे मामले में कटघोरा डीएफओ ने बड़े पैमाने पर कटाई की जानकारी होने से इनकार किया है।

100-100 हेक्टेयर में लगा था प्लांटेशन, अब कटाई का विरोध

ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए पत्र के अनुसार, लगभग 16-17 वर्ष पहले पसान परिक्षेत्र के सेमरा बीट में नवतोड़ (अतिक्रमण) रोकने के लिए तुलसीडांड और ग्राम सैला के कटेलामुड़ा में 100-100 हेक्टेयर भूमि पर रतनजोत पौधों का वृहद प्लांटेशन (रोपण) किया गया था।

ग्रामीणों का कहना है कि पसान रेंज द्वारा इस क्षेत्र के पुराने और उपयोगी रतनजोत पौधों को उखाड़कर और काटकर उनकी जगह दूसरा पौधा लगाया जा रहा है, जिससे भूमि का क्षरण (मिट्टी का बहना) शुरू हो गया है। ग्रामीणों ने इसके औषधीय गुणों और पर्यावरण के फायदों का हवाला देते हुए इस कटाई का पुरजोर विरोध किया है।

पूर्व के रोपण पर भी भ्रष्टाचार के आरोप

शिकायत पत्र में ग्रामीणों ने साल 2022-23 में तुलसीडांड रोपण में किए गए मिश्रित प्रजाति के रोपण पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उस समय किए गए रोपण में पौधों का कोई विकास नहीं हुआ है, जिससे शासकीय राशि का दुरुपयोग साफ दिखाई दे रहा है। इसके बावजूद विभाग दोबारा पुराने हरे-भरे पौधों को नष्ट कर नया रोपण कर रहा है।

🎤 मामले में वनमंडलाधिकारी (DFO) कटघोरा का पक्ष:

ग्रामीणों के इन गंभीर आरोपों और क्षेत्र में चल रही सुगबुगाहट पर जब कटघोरा डीएफओ से सीधा सवाल किया गया, तो उन्होंने विभागीय नियमों का हवाला देते हुए अपनी बात रखी। डीएफओ से हुई बातचीत के मुख्य अंश इस प्रकार हैं:

वृहद कटाई से इनकार, साफ-सफाई की बात:

डीएफओ ने कहा, "विभाग द्वारा जो भी कार्य किए जाते हैं, वे वानिकी दृष्टिकोण के तहत वन संवर्धन और संरक्षण के लिए होते हैं। रतन जोत के जो पौधे टूट-फूट जाते हैं, केवल उनकी साफ-सफाई कर नया पौधा रोपण का कार्य किया जाता है। अभी मेरे पास ऐसी कोई जानकारी नहीं आई है कि कहीं पर वृहद (बड़े पैमाने पर) रूप से रतनजोत की कटाई हो रही है। खबरों के माध्यम से यह बात चल रही है, जिसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

"रतनजोत के लिए नहीं चाहिए परमिशन:

जब उनसे पूछा गया कि क्या रतनजोत काटने के लिए किसी परमिशन की जरूरत होती है, तो उन्होंने स्पष्ट किया, "रतन जोत वानिकी पौधे की श्रेणी में नहीं आते हैं। इसलिए विभाग वन संवर्धन के लिए टूटे-फूटे पौधों को साफ कर नया रोपण करता है।

"पुरस्कार की जानकारी नहीं:

तत्कालीन कलेक्टर अशोक अग्रवाल द्वारा वनपाल को इस उत्कृष्ट प्लांटेशन के लिए सम्मानित किए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्हें इस संबंध में जानकारी नहीं है।

संज्ञान में नहीं है मामला, जांच के बाद होगी कार्रवाई:

मामला संज्ञान में होने और आगे की कार्रवाई के सवाल पर डीएफओ ने कहा, "यह मामला अभी मेरे संज्ञान में नहीं है। हमारे पास अभी तक कोई लिखित शिकायत नहीं आई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि मामला किस क्षेत्र का है और कितने क्षेत्रफल पर कटाई हुई है। लिखित शिकायत या मामला सामने आने के बाद ही तथ्यों के आधार पर आगे कुछ कहा या किया जाएगा।

"जांच की मांग पर अड़े ग्रामीण

एक तरफ जहाँ वन विभाग बड़े पैमाने पर कटाई की बात को सिर्फ एक चर्चा बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण मुख्य वन संरक्षक कार्यालय बिलासपुर में पत्र सौंपकर इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं। अब देखना होगा कि ग्रामीणों की लिखित शिकायत डीएफओ कार्यालय पहुँचने के बाद विभाग इस पर क्या रुख अपनाता है।

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