कटघोरा में रेत माफिया जमींदोज: : IAS विपिन दुबे की पदस्थापना के बाद ताबड़तोड़ एक्शन, खौफ में खनन माफिया; पर रेत के बिना थमे विकास कार्य
Shubh Arvind Sharma
Tue, Oct 20, 2026
कटघोरा में रेत माफिया जमींदोज: IAS विपिन दुबे की पदस्थापना के बाद ताबड़तोड़ एक्शन, खौफ में खनन माफिया; पर रेत के बिना थमे विकास कार्य
कटघोरा। कटघोरा अनुविभाग में नए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के रूप में आईएएस विपिन दुबे की पदस्थापना के बाद से ही रेत माफियाओं के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। नए प्रशासनिक मुखिया के कड़े तेवरों और खनिज विभाग के साथ उनकी संयुक्त 'सर्जिकल स्ट्राइक' ने क्षेत्र के रसूखदार रेत माफियाओं को पूरी तरह जमींदोज कर दिया है। प्रशासन की इस 'जीरो टॉलरेंस' नीति से जहां अवैध उत्खनन पर पूरी तरह ब्रेक लग गया है, वहीं इसका दूसरा पहलू यह है कि बाजार में अचानक रेत की भारी किल्लत हो गई है, जिससे सरकारी और निजी निर्माण कार्य पूरी तरह थप होने की कगार पर पहुंच गए हैं।

सिंघम स्टाइल में कार्रवाई: माफियाओं की रीढ़ की हड्डी टूटी
क्षेत्र की जीवनदायिनी नदियों से अवैध रूप से रेत की चोरी करने वाले सिंडिकेट को नेस्तनाबूद करने के लिए आईएएस विपिन दुबे ने पदभार संभालते ही कड़ा रुख अख्तियार कर लिया था। उनके कड़े निर्देशों पर राजस्व, पुलिस और खनिज विभाग की संयुक्त टीमों ने रातों-रात छापेमारी की। माफियाओं के अवैध रेत भंडारों (डिपो) को सील कर दिया गया है और अवैध परिवहन में लगी दर्जनों गाड़ियों को जब्त कर उन पर भारी-भरकम जुर्माना लगाया गया है। प्रशासन की इस चौतरफा घेराबंदी का असर यह हुआ है कि जो रेत माफिया कल तक प्रशासनिक तंत्र को ठेंगा दिखाकर बेखौफ घूम रहे थे, वे अब पूरी तरह भूमिगत (जमींदोज) हो चुके हैं।

रेत संकट से विकास कार्यों पर लगा ब्रेक
एक तरफ जहां अवैध धंधे पर लगाम लगने से आम जनता में प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ा है, वहीं दूसरी तरफ निर्माण क्षेत्र में एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। रेत माफियाओं के भूमिगत होने और वैध आपूर्ति सुचारू न होने के कारण कटघोरा के विकास कार्यों पर सीधे ब्रेक लग गया है:
• प्रधानमंत्री आवास योजना पर संकट: रेत की एक-एक बोरी के लिए तरस रहे गरीब हितग्राहियों के पक्के मकानों का काम बीच में ही लटक गया है।
• सरकारी बुनियादी ढांचा प्रभावित: क्षेत्र में चल रहे सड़कों के चौड़ीकरण, पुल-पुलियों के निर्माण और सरकारी कार्यालय भवनों के निर्माण की रफ्तार बेहद धीमी या पूरी तरह बंद हो चुकी है।
• मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट: निजी मकान बनाने वाले लोग भी रेत न मिलने के कारण काम बंद करा चुके हैं। इससे निर्माण क्षेत्र से जुड़े हजारों राजमिस्त्री और दैनिक मजदूरों के सामने परिवार पालने की नौबत आ गई है।
वैध खदानें शुरू करने की उठ रही मांग
स्थानीय नागरिकों और ठेकेदारों का स्पष्ट कहना है कि वे एसडीएम विपिन दुबे की इस ईमानदार और सख्त कार्रवाई की सराहना करते हैं, क्योंकि नदियों का पर्यावरण बचाना बेहद जरूरी है। लेकिन इसके साथ ही वे मांग कर रहे हैं कि विकास की गति को बनाए रखने के लिए शासन को वैध रेत खदानों (लीज़) को तुरंत चालू करना चाहिए ताकि आम जनता को वाजिब दाम पर और कानूनी रूप से रेत मिल सके।
अब देखना यह होगा कि आईएएस विपिन दुबे का कड़ा प्रशासन अवैध रेत के काले कारोबार को पूरी तरह बंद रखते हुए आम जनता और सरकारी परियोजनाओं के लिए वैध रेत की सुचारू आपूर्ति का क्या रास्ता निकालता है।
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कोरबा कटघोरा
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