कटघोरा_पालिका_घोटाला: रात के अंधेरे में खोदाई कर सच छुपाने का खेल खत्म : नए IAS सीएमओ को सौंपे साक्ष्य; जनता के पैसों का दुरुपयोग करने वालों पर तत्काल निलंबन और FIR की मांग तेज!
Shubh Arvind Sharma
Tue, Oct 13, 2026
कटघोरा_पालिका_घोटाला: रात के अंधेरे में खोदाई कर सच छुपाने का खेल खत्म! नए IAS सीएमओ को सौंपे साक्ष्य; जनता के पैसों का दुरुपयोग करने वालों पर तत्काल निलंबन और FIR की मांग तेज!

कटघोरा (कोरबा)। नगर पालिका परिषद कटघोरा में मलाईदार कुर्सियों पर बैठे भ्रष्ट कारिंदों और तकनीकी अमले की जुगलबंदी ने 'अंधेर नगरी चौपट राजा, टके सेर भाजी टके सेर खाजा' वाली कहावत को पूरी तरह चरितार्थ कर दिया है। वार्ड क्रमांक 05 (नवागांव) में पाइपलाइन विस्तार के नाम पर सरकारी खजाने की निर्लज्जता से लूट मची है। 14 अगस्त 2026 को नगर पालिका द्वारा जारी आधिकारिक पत्र (क्रमांक/1217/सी.एम. हेल्पलाइन/न0पा0प0/2026) से यह सनसनीखेज और शर्मनाक खुलासा हुआ है कि मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) ने बिलासपुर के संयुक्त संचालक को लिखित में रिपोर्ट भेजी है कि "ओ.पी.वी.सी. पाइपलाइन विस्तार का कार्य पूर्ण कर लिया गया है और आवेदक का आरोप निराधार है।"

लेकिन इस कागजी दावे के उलट धरातल का कड़वा सच यह है कि वार्ड की जनता को आज तक पानी की एक बूंद भी नसीब नहीं हुई है। जब पहले से कागजों पर 'शत-प्रतिशत पूर्ण' दिखाई गई यह ओ.पी.वी.सी. पाइपलाइन आज भी आधी-अधूरी और सूखी पड़ी है, तो सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह खड़ा होता है कि अब उसी के समानांतर लोहे (डी.आई.) की नई पाइपलाइन बिछाकर लाखों रुपये का अतिरिक्त चूना किसे और क्यों लगाया जा रहा है?

कानूनी जाल में फंसा पालिका प्रशासन: 'चोरी और ऊपर से सीनाजोरी' का खेल
यह पूरा मामला सीधे तौर पर छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम, 1961 के वित्तीय नियमों की धज्जियां उड़ाने और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात व धोखाधड़ी का जीता-जागता सबूत है। जब तकनीकी अमला बकायदा रनिंग बिल पास करवाकर कार्य पूर्ण होने का प्रतिवेदन दे चुका है, तो फिर उसी रूट पर बिना किसी नई प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति के समानांतर लोहे की पाइपलाइन बिछाना सीधे तौर पर वित्तीय गबन और शासकीय राशि का दुरुपयोग है।
सजग नागरिकों का आरोप है कि पूर्व में जब भी इस आधे-अधूरे काम के खिलाफ आवाज उठाई गई, तब-तब पालिका प्रशासन ने 'रातों-रात' जेसीबी (JCB) लगाकर खोदाई का खेल खेला था ताकि सच को जमीन के नीचे दफन किया जा सके। आज भी जब इस समानांतर लोहे की पाइपलाइन बिछाने के औचित्य पर सवाल खड़े हुए हैं, तो कहानी बिल्कुल वही है। रात के सन्नाटे में चुपके से मशीनों को दौड़ाकर आनन-फानन में लीपापोती करने की कोशिश की जा रही है।

उप-अभियंता घिरे तो स्वीकृत पाइप को ही बताया 'गुणवत्ता विहीन'!
जब एक ही रूट पर पहले से स्वीकृत ओ.पी.वी.सी. पाइपलाइन को अधूरा छोड़कर, ठीक बगल में लोहे (डी.आई.) का नया पाइप बिछाने का यह दोहरा खेल रंगे हाथों पकड़ा गया, तो संबंधित उप-अभियंता (सब-इंजीनियर) अपनी चमड़ी बचाने के लिए 'उल्टा चोर कोतवाल को डांटे' की तर्ज पर अब एक नया और हास्यास्पद तकनीकी बहाना बना रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि उप-अभियंता अब खुद के ही पास किए गए और सीएमओ द्वारा 'पूर्ण' बताए गए ओ.पी.वी.सी. पाइप को ही 'गुणवत्ता विहीन' और अनुपयुक्त बताने में जुटे हैं।
इस विरोधाभासी और झूठे दावों पर कानून के जानकारों और जनता द्वारा सीधे शब्द बाण छोड़े जा रहे हैं:
1. यदि पहले बिछाई गई ओ.पी.वी.सी. पाइप सचमुच 'गुणवत्ता विहीन' थी, तो टेंडर (सिस्टम टेंडर नंबर 164562) के तहत इसका ₹36.48 lakh का भुगतान क्यों और किस आधार पर कर दिया गया? क्या यह जनता की गाढ़ी कमाई का सीधे तौर पर 'बंदरबांट' नहीं है?
2. जब धरातल पर जनता को पानी की एक बूंद भी नहीं मिली, तो अधिकारियों ने किस कानून के तहत बिलासपुर संयुक्त संचालक को कार्य 'पूर्ण' होने का मिथ्या और भ्रामक प्रतिवेदन सौंप दिया?
3. कागजों पर काम पूरा दिखाकर, बगल में समानांतर लोहे का पाइप बिछाना क्या सीधे तौर पर 'एक ही काम का दोबारा बिल' बनाकर सरकारी पैसे को डकारने की सोची-समझी साजिश नहीं है?

नवागंतुक युवा IAS अधिकारी को 'सब्जबाग दिखाने' की हिमाकत!
सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, पालिका के भीतर जड़े जमा चुका भ्रष्ट सिंडिकेट इतना बेखौफ है कि वह नवनियुक्त आईएएस (IAS) सीएमओ की आंखों में भी धूल झोंकने से बाज नहीं आ रहा है। अपनी वित्तीय अनियमितताओं और इस झूठी रिपोर्ट को छुपाने के लिए जिम्मेदार अधिकारी और उप-अभियंता फाइलों में 'हेर-फेर और लीपापोती' कर रहे हैं। वे नए आईएएस अधिकारी के सामने लगातार गलत, मनगढ़ंत और भटकाने वाली तकनीकी जानकारियां परोस रहे हैं, ताकि इस भयंकर भ्रष्टाचार पर परदा डाला जा सके।

भौतिक सत्यापन की खुली चुनौती और FIR की मांग: 'सांच को आंच क्या?'
इस अंधेरगर्दी और तानाशाही के खिलाफ शिकायतकर्ता अनिल अग्रवाल ने 'लोहे के चने चबाने' जैसी मजबूत कानूनी चुनौती दी है। उन्होंने मांग की है कि पूरे कार्यस्थल का वार्ड पार्षद और आम नागरिकों की मौजूदगी में निष्पक्ष भौतिक सत्यापन कराया जाए और इसका अक्षरशः मिलान माप पुस्तिका (Measurement Book / M.B.) से हो।

शिकायतकर्ता ने सख्त रुख अपनाते हुए दो टूक शब्दों में मांग की है कि, "यदि इस निष्पक्ष भौतिक सत्यापन में नगर पालिका के इस काले कारनामे और भयंकर भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ होता है, तो जनता के खून-पसीने की कमाई और सरकारी पैसों का खुलेआम दुरुपयोग करने वाले संबंधित दोषी अधिकारियों को बिना किसी देरी के तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए और उनके खिलाफ धोखाधड़ी व गबन की विभिन्न गैर-जमानती धाराओं के तहत तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कानूनी जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाए।"

अग्रवाल ने सीना ठोककर प्रशासन को ललकारते हुए कहा कि, "यदि नगर पालिका के इंजीनियरों का दामन साफ है, तो वे 'सांच को आंच क्या' की तर्ज पर इस जांच का सामना करें। अगर निष्पक्ष जांच में कोई अनियमितता नहीं पाई जाती है, तो जांच की प्रक्रिया में आने वाली पाई-पाई का भुगतान मैं अपनी जेब से करने को तैयार हूं।"
इस पूरे मामले की आधिकारिक प्रतिलिपि बिलासपुर संभाग के संयुक्त संचालक (नगरीय प्रशासन) और अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कटघोरा को कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई हेतु प्रेषित कर दी गई है। अब देखना यह होगा कि कटघोरा को भ्रष्टाचार का चारागाह बना चुके इन बेलगाम अधिकारियों और गुमराह करने वाले उप-अभियंता पर नए IAS सीएमओ कानून का क्या हंटर चलाते हैं, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर 'इतिश्री' हो जाता है।
Tags :
कोरबा कटघोरा
विज्ञापन
विज्ञापन