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भ्रष्टाचार की गंगा में हाथ धोने वाले ठेकेदार के फूले हाथ-पांव: : अटल प्रतिमा घोटाला गरमाते ही बैकफुट पर आई निर्माण एजेंसी; नगर पालिका क्षेत्र में ग्राम पंचायत का यह कैसा खेल?

Shubh Arvind Sharma

Wed, Aug 26, 2026

भ्रष्टाचार की गंगा में हाथ धोने वाले ठेकेदार के फूले हाथ-पांव: अटल प्रतिमा घोटाला गरमाते ही बैकफुट पर आई निर्माण एजेंसी; नगर पालिका क्षेत्र में ग्राम पंचायत का यह कैसा खेल?

कटघोरा (कोरबा)। शासकीय प्राथमिक शाला नवागांव (कटघोरा) के नए भवन निर्माण में चल रहे नियम विरुद्ध खेल पर अब एक बेहद चौकाने वाला प्रशासनिक खुलासा हुआ है। सूत्रों द्वारा किए गए एक खुफिया स्टिंग ऑपरेशन के वीडियो में जब कटघोरा के जनपद मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) से सीधा सवाल किया गया कि काम नगर पालिका (शहरी क्षेत्र) में हो रहा है और इसकी निर्माण एजेंसी एक ग्राम पंचायत (ग्रामीण संस्था) को क्यों बनाया गया है? तो कैमरे पर उन्होंने इस गंभीर गलती को खुले तौर पर स्वीकार किया।

लेकिन इसके साथ ही उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए एक बेहद हैरान करने वाला बयान दिया। उन्होंने कैमरे के सामने कहा, "यह तो कांग्रेस के जमाने से चला आ रहा है, अब आगे से ऐसा नहीं होगा और अब पंचायत कोई भी काम नगर पालिका क्षेत्र में नहीं करेगी।" वीडियो रिकॉर्डिंग में कैद जनपद CEO के इस गैर-जिम्मेदाराना बयान से यह साफ हो गया है कि प्रशासन नियमों के इस खुले उल्लंघन से पूरी तरह वाकिफ था, फिर भी पिछले कार्यकाल की दुहाई देकर इस पर परदा डालने की कोशिश की जाती रही।

बिना एनओसी (NOC) के खड़ा कर दिया ढांचा?

इस पूरे मामले में एक और सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या नगर पालिका परिषद कटघोरा ने इस निर्माण कार्य के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी किया है या नहीं? छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम के तहत शहरी सीमा के भीतर किसी भी प्रकार के सरकारी भवन के निर्माण से पहले स्थानीय निकाय (नगर पालिका) से तकनीकी स्वीकृति, लेआउट पास कराना और NOC लेना अनिवार्य है। सूत्रों की मानें तो बिना नगर पालिका की अनुमति और NOC के ही ग्राम पंचायत ने यहाँ अंधेर नगरी चौपट राजा की तर्ज पर अवैध रूप से ढांचा खड़ा करना शुरू कर दिया, जो कि एक गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अपराध की श्रेणी में आता है। इसी कानूनी पेंच के फंसने के डर से काम को सालभर दबाकर रखा गया था।

DMF फंड से ₹15.65 लाख की मंजूरी, ₹6.26 लाख हजम कर सालभर बंद रखा काम

इस पूरे प्रोजेक्ट की वित्तीय कड़ियों पर नजर डालें तो जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) मद से इस स्कूल भवन के लिए कुल ₹15.65 लाख की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई है। इसमें से निर्माण एजेंसी को पहली किस्त के रूप में ₹6.26 लाख का भुगतान भी बहुत पहले किया जा चुका है। इसके बावजूद सरकारी पैसे को दबाकर ठेकेदार ने केवल छज्जा लेवल तक का ढांचा खड़ा किया और पिछले एक साल से कुंभकर्णी नींद सोया रहा।

अटल प्रतिमा घोटाला गरमाते ही बगले झांकने लगा ठेकेदार

इस बीच जैसे ही कटघोरा नगर पालिका में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा में हुए ₹13.60 लाख के चर्चित घोटाले का मुद्दा गरमाया, तो जांच की आंच से बचने के लिए ठेकेदार और अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। चौतरफा राजनीतिक दबाव और भ्रष्टाचार की पोल खुलने के डर से ठेकेदार ने आनन-फानन में मजदूर लगाकर स्कूल का अधूरा काम दोबारा शुरू कराया है ताकि चोरी और ऊपर से सीनाजोरी का यह खेल छिप सके।

सूत्रों का बड़ा खुलासा: हेडमास्टर पर झाड़ता था धौंस, देता था धमकी

सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, एक साल के लंबे समय तक जब भी स्कूल प्रबंधन या हेडमास्टर (प्रधान पाठक) बच्चों की सुरक्षा का हवाला देकर ठेकेदार से काम चालू करने का आग्रह करते थे, तो वह आसमान पर थूकने जैसी हरकत करते हुए अपनी ऊंची राजनीतिक और प्रशासनिक पहुंच की धौंस दिखाता था। ठेकेदार अपनी लापरवाही और नियम विरुद्ध साठगांठ को छिपाने के लिए स्कूल प्रशासन के साथ दादागिरी और सीधे तौर पर लाल आंखें दिखाने पर उतारू हो जाता था, जिससे शिक्षक बेहद डरे और सहमे हुए थे।

जर्जर भवन में मौत के साए में पढ़ने को मजबूर है मासूम

लाखों रुपये का फंड जारी होने के बाद भी ठेकेदार की मनमानी के कारण स्कूल के मासूम बच्चे बेहद जर्जर हो चुके पुराने भवन में बैठकर हथेली पर जान रखकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जहां आगामी वर्षा ऋतु में किसी भी वक्त छत गिरने या बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। आखिरकार हेडमास्टर ने हिम्मत दिखाते हुए विकास खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कटघोरा को लिखित शिकायत भेजी, जिसके बाद यह पूरा भंडाफोड़ हुआ।

अब देखना यह होगा कि इस सनसनीखेज खुलासे और खबर के प्रकाशन के बाद जिला प्रशासन किस तरह हरकत में आता है? क्या 'दूध का दूध और पानी का पानी' करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही और नगर पालिका क्षेत्र में बिना NOC नियम विरुद्ध काम सौंपने वाले इस पूरे गठजोड़ की उच्च स्तरीय जांच होगी? या फिर हेडमास्टर को धमकाने वाले रसूखदार ठेकेदार पर कड़ी दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई की जाएगी, यह आने वाला समय ही बताएगा।

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कोरबा कटघोरा

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