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जनसमस्याओं के अंबार पर सोए एल्डरमैन, जनता पूछ रही- 'किस बात की मलाई खा रहे हो?'

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भ्रष्टाचार का गढ़ बनी कटघोरा पालिका: : जनसमस्याओं के अंबार पर सोए एल्डरमैन, जनता पूछ रही- 'किस बात की मलाई खा रहे हो?'

Shubh Arvind Sharma

Tue, Aug 25, 2026

भ्रष्टाचार का गढ़ बनी कटघोरा पालिका: जनसमस्याओं के अंबार पर सोए एल्डरमैन, जनता पूछ रही- 'किस बात की मलाई खा रहे हो?'

कटघोरा। कटघोरा नगर पालिका परिषद इस समय अंधेर नगरी चौपट राजा की जीती-जागती मिसाल बन चुकी है। शहर में चारों तरफ जनसमस्याओं का अंबार लगा हुआ है और प्रशासनिक ढर्रा पूरी तरह पटरी से उतर चुका है। राजनीति और स्वार्थ के इस महाजाल में आज हालात ऐसे हो चुके हैं कि अब तो जनता भी नहीं समझ पा रही कि आखिर कौन किसका है, कौन पक्ष में है और कौन विपक्ष में। पर्दे के पीछे सब चिट्ट भी मेरी, पट्ट भी मेरी का खेल खेल रहे हैं। लेकिन सत्ता के गलियारों में चल रही इस नूरा-कुश्ती के बीच जनता यह जरूर समझ गई है कि उनके टैक्स की गाढ़ी कमाई और खून-पसीने के पैसों की जमकर बंदरबांट हो रही है।

याद करें 27 जुलाई 2026, सोमवार का वह दिन, जब वार्ड क्र. 03 सांस्कृतिक भवन, कटघोरा में शाम 4:30 बजे बड़ी ही धूमधाम से नवनियुक्त मनोनीत पार्षदों (एल्डरमेनों) का शपध ग्रहण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। मुख्य अतिथि कटघोरा विधायक श्री प्रेमचंद पटेल जी, विशिष्ट अतिथि न.पा.प. अध्यक्ष श्री राज जायसवाल जी, उपाध्यक्ष श्री लालबाबू ठाकुर जी एवं समस्त पार्षदगणों की गरिमामयी उपस्थिति में एल्डरमेनों ने बड़े-बड़े दावों के साथ पद की शपथ ली थी। परंतु हैरान करने वाली बात यह है कि इस भव्य शुरुआत के बाद आज शहर की गंभीर बदहाली और सार्वजनिक धन की खुली लूट पर इन्हीं नवनियुक्त एल्डरमैनों ने धृतराष्ट्र जैसी चुप्पी साधी हुई है। लाव-लश्कर के साथ पद की गरिमा का दावा करने वाले ये मनोनीत सदस्य आज पूरी व्यवस्था के सामने मौन धारण कर घुटने टेके बैठे हैं और जनता की आंखों में धूल झोंक रहे हैं।

1. आधा-अधूरा पाइपलाइन विस्तार: अनिल अग्रवाल की शिकायत पर भी एल्डरमैन मौन

नगर में पाइपलाइन विस्तार के नाम पर सरकारी खजाने से भारी-भरकम राशि व्यय की जा चुकी है, लेकिन धरातल पर यह पूरा मामला घोर अनियमितताओं की भेंट चढ़ता दिख रहा है। सजग नागरिक और शिकायतकर्ता अनिल अग्रवाल ने इस गंभीर मामले को लेकर सक्षम प्राधिकारियों के समक्ष बकायदा लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने वैधानिक रूप से यह उजागर किया है कि शहर में पाइपलाइन विस्तार का काम आधा-अधूरा छोड़ दिया गया है और इस पूरी योजना की उपयोगिता ही संदिग्ध है कि आखिर इससे किस वार्ड को और कैसे पानी मिलेगा। पाइपलाइन बिछाने के नाम पर सड़कों को खोदकर जी का जंजाल बना दिया गया, लेकिन आज भी वार्डों में दूषित, गंदा और बदबूदार पानी सप्लाई होने के आरोप लग रहे हैं। अनिल अग्रवाल की इस पुख्ता वैधानिक शिकायत के बाद भी एल्डरमैनों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।

2. 'अटक मूर्ति मामला': ब्रॉन्ज के नाम पर सीमेंट का खेल, कथित तौर पर भारी घोटाला

कटघोरा के अटल परिसर में स्थापित पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा के निर्माण में हुई कथित वित्तीय गड़बड़ी इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है। कांस्य (Bronze) की मूर्ति के नाम पर कथित तौर पर करीब 13 से 14 लाख रुपये की राशि को खुर्द-बुर्द करने के गंभीर आरोप लगे हैं और मौके पर घटिया सीमेंट-कंक्रीट की मूर्ति खड़ी कर दी गई। पहली ही बारिश में जब इसकी परतें उखड़ीं, तो अव्यवस्था का चेहरा आइने की तरह साफ हो गया। इस गंभीर जालसाजी और कथित वित्तीय अनियमितता पर कानूनी कार्रवाई की मांग करने के बजाय एल्डरमैनों का मौन रहना उनकी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

3. सरगबन्ध तालाब टेंडर और लाखों की चौपाटी में अव्यवस्था

नगर के ऐतिहासिक सरगबन्ध तालाब के टेंडर और सौंदर्यीकरण के नाम पर लाखों रुपये का वारा-न्यारा करने की तैयारी है, लेकिन धरातल पर काम की गुणवत्ता शून्य होने के आरोप हैं। इसी तरह लाखों रुपये की सार्वजनिक लागत से बनाई गई शहर की चौपाटी बदहाली का शिकार हो चुकी है। असामाजिक तत्वों का जमावड़ा, गंदगी और अव्यवस्था के कारण यह स्थल अपनी उपयोगिता खो चुका है। सरकारी खजाने को चुना लगाने के इस खेल में एल्डरमैनों की रहस्यमयी चुप्पी कई तरह के संदेह पैदा करती है।

4. कचरों का अंबार और सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा: किसान संघ और विपक्ष का फूटा गुस्सा

नगर पालिका का स्वच्छता दस्ता केवल कागजों पर दौड़ रहा है। शहर के चौक-चौराहों और गलियों में कचरों का अंबार लगा हुआ है। वहीं, मुख्य सड़कों पर आवारा मवेशियों का डेरा होने के कारण आए दिन गंभीर सड़क हादसे हो रहे हैं और किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं। इस मुद्दे पर मुख्य विपक्ष और मूल किसान संघ ने पालिका प्रशासन की अनियमितताओं के खिलाफ जमकर हल्ला बोला और उग्र आंदोलन किया। किसानों और विपक्ष ने सड़कों पर उतरकर व्यवस्था को जमकर कोसा, लेकिन एल्डरमैन तब भी कान में तेल डालकर तमाशबीन बने रहे। जनता पूछ रही है कि जब पूरा शहर सड़कों पर संघर्ष कर रहा था, तब ये मनोनीत प्रतिनिधि किस गुफा में छिपे बैठे थे?

5. पालिका में कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के संगीन आरोप: विपक्ष और जनता में भारी रोष

विपक्ष और स्थानीय नागरिकों ने नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर उंगली उठाई है। मुख्य विपक्षी दल और जागरूक वार्डवासियों का खुला आरोप है कि पालिका के भीतर कथित रूप से बिना अनुचित 'कमीशन' के कोई भी फाइल आगे नहीं सरकती है। जनता के बीच यह व्यापक चर्चा है कि निर्माण कार्यों के टेंडर से लेकर भुगतान दस्तावेजों, बिलों और माप पुस्तिकाओं (MB) की प्रविष्टि में कथित रूप से नियमों को ताक पर रखकर वैधानिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया जा रहा है। नागरिकों का आरोप है कि कतिपय अधिकारियों और ठेकेदारों की कथित साठगांठ के चलते सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। विपक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि इन कथित भ्रष्टाचार के मामलों और कमीशनखोरी के आरोपों की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो वे उग्र आंदोलन और कानूनी लड़ाई के लिए बाध्य होंगे। हैरान करने वाली बात यह है कि कानूनन इन सब पर नजर रखने की वैधानिक जिम्मेदारी निभाने के बजाय एल्डरमैन अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़कर कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं।

एल्डरमैनों से सीधा सवाल

नगरीय निकाय नियमों के तहत एल्डरमैनों की नियुक्ति इसलिए की जाती है ताकि वे अपने सामाजिक और प्रशासनिक अनुभव से शहर की दशा सुधारें। परंतु कटघोरा में यह व्यवस्था ऊँट के मुँह में जीरा साबित हो रही है। वार्डवासियों ने सीधे शब्दों में पूछा है कि जब अनिल अग्रवाल जैसे सजग नागरिक आधा-अधूरा पाइपलाइन विस्तार पर शिकायत कर रहे हैं, और जब विपक्ष व किसान संघ भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर चक्काजाम आंदोलन कर रहे हैं, तो ये एल्डरमैन आखिर किसके इशारे पर मौन हैं? यदि वे जनता की आवाज बुलंद नहीं कर सकते, तो ऐसे दिखावटी पदों का बोझ टैक्सपेयर्स के पैसों पर डालकर सरकारी खजाने को क्यों चूसा जा रहा है?

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कोरबा कटघोरा

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