कटघोरा नगर पालिका भ्रष्टाचार मामला: : क्षेत्रीय नगरीय प्रशासन संयुक्त संचालक (Joint Director) कार्यालय की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
Shubh Arvind Sharma
Fri, Aug 21, 2026
कटघोरा नगर पालिका भ्रष्टाचार मामला: क्षेत्रीय नगरीय प्रशासन संयुक्त संचालक (Joint Director) कार्यालय की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
कटघोरा। नगर पालिका परिषद कटघोरा में 15वें वित्त मद की राशि से जुड़े कथित करोड़ों रुपये के पाइप लाइन विस्तार मामले ने अब एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मोड़ ले लिया है। शिकायतकर्ता द्वारा शासन को सौंपे गए दस्तावेजों और लगे आरोपों के बाद अब बिलासपुर स्थित क्षेत्रीय नगरीय प्रशासन एवं विकास कार्यालय के संयुक्त संचालक (Joint Director) की भूमिका और उनके सुपरविजन विंग की कार्यशैली पर तीखे सवाल खड़े होने लगे हैं।

PHE ने कहा—"काम पूरा", फिर पालिका ने क्यों दिखाई जल्दबाजी?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा पेंच लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE Department) के उस रुख से फंसा है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि विभाग द्वारा वर्ष 2024-25 में ही संबंधित क्षेत्रों में पाइप लाइन विस्तार का कार्य नियमानुसार पूरा किया जा चुका है। PHE विभाग के इस कथित दावे के बाद अब यह सवाल हवा में तैर रहा है कि जब एक सरकारी एजेंसी वहां पहले ही बुनियादी काम पूरा कर चुकी थी, तो नगर पालिका प्रशासन को उसी के समानांतर ओपीवीसी (OPVC) पाइप की 'आधी-अधूरी' लाइन बिछाने की मंजूरी देने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

पानी का अता-पता नहीं, फिर यह कैसा प्रोजेक्ट?
शिकायत के आधार पर उठाए जा रहे सवालों के मुताबिक, इस नई बिछाई गई तथाकथित लाइन के लिए किसी स्वतंत्र जलस्रोत या सुचारू सप्लाई चेन की व्यवस्था स्पष्ट नहीं है। ऐसे में स्थानीय जानकारों और नागरिकों द्वारा यह गंभीर आरोप लगाया जा रहा है कि बिना किसी ठोस उपयोगिता और बिना पर्याप्त जलस्रोत के कागजों पर इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना, कहीं विकास के नाम पर सरकारी खजाने के लाखों रुपये की हेराफेरी करने और जनता की आंखों में धूल झोंकने का एक कथित प्रशासनिक ढोंग तो नहीं है?

शिकायत के बाद मचा हड़कंप—आनन-फानन में खोदाई का 'खेल'
सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही इस कथित घोटाले की उच्च स्तरीय शिकायत आला अधिकारियों तक पहुंची, नगर पालिका खेमे में जबरदस्त हड़कंप मच गया। खुद को कानूनी कार्रवाई से बचाने की जुगत में आनन-फानन में जमीन पर लीपापोती शुरू कर दी गई। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि शिकायत दर्ज होने के बाद आनन-फानन में कुछ जगहों पर रातों-रात खोदाई करने और कहीं-कहीं आनन-फानन में पाइप बिछाने का कथित ढोंग रचा गया, ताकि कागजी दावों को सच साबित करने का एक जमीनी आधार तैयार किया जा सके।

बयान देने से बच रहे सीएमओ, चुप्पी पर गहराया राज
मामले में मचे इस बवाल और आनन-फानन में की गई खोदाई को लेकर जब नगर पालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो वे कथित तौर पर मीडिया और तीखे सवालों से बचते नजर आए। सीएमओ का इस संवेदनशील विषय पर आधिकारिक बयान देने से कथित रूप से कतराना और चुप्पी साधे रखना, इस बात की ओर इशारा करता है कि पालिका प्रशासन के पास इन तकनीकी विरोधाभासों का फिलहाल कोई पारदर्शी जवाब नहीं है।

अधीक्षण अभियंता अली बक्श की 'रहस्यमयी' जांच पर जनता के सवाल
इस पूरे कथित फर्जीवाड़े की हकीकत खंगालने बिलासपुर से अधीक्षण अभियंता अली बक्श जांच के लिए कटघोरा पहुंचे थे। बिलासपुर से आए इस उच्च तकनीकी अधिकारी के दौरे को लेकर अब नगर पालिका क्षेत्र में एक नया रहस्य गहरा गया है। आम जनता और शिकायतकर्ता यह सवाल उठा रहे हैं कि अधीक्षण अभियंता अली बक्श ने अपनी जांच में वास्तव में क्या पाया? क्या उन्होंने उन वार्डों का जमीनी और निष्पक्ष स्थल निरीक्षण किया जहां फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप लगे हैं, या फिर पूरी जांच हमेशा की तरह नगर पालिका के बंद कमरों में कागजी खानापूर्ति और फाइलों को इधर-उधर करने तक ही सीमित रह गई? यह प्रक्रिया पूरी तरह से रहस्य के घेरे में है।

करोड़ों की निविदा और जेडी कार्यालय का कथित 'मौन'
दस्तावेजों के अनुसार, नगर पालिका क्षेत्र के विभिन्न वार्डों (वार्ड क्र. 4, 5, 10, 8 और 15) में ओ.पी.वी.सी. पाइप लाइन विस्तार के नाम पर क्रमशः 36.53 लाख और 41.21 लाख रुपये की निविदाएं (क्र. 164562 और 164564) जारी की गई थीं। शिकायतकर्ता का सीधा आरोप है कि धरातल पर बिना वास्तविक कार्य किए ही राशि का आहरण कर आपस में बंदरबांट कर लिया गया।
कानूनी और प्रशासनिक नियमों के तहत अधीनस्थ नगरीय निकायों के वित्तीय आवंटन, निविदा प्रक्रियाओं और कार्यों के भौतिक सत्यापन की अंतिम जवाबदेही बिलासपुर स्थित क्षेत्रीय संयुक्त संचालक (Joint Director) कार्यालय की होती है। लेकिन दो विभागों के कार्यों में इतने बड़े विरोधाभास, कथित फर्जी भुगतान और अब जांच के नाम पर हो रही लीपापोती की शिकायतों के बावजूद जेडी कार्यालय के तकनीकी और मॉनिटरिंग विंग का इस पर पारदर्शी रुख न अपनाना, उनकी कार्यप्रणाली को पूरी तरह संदेह के घेरे में खड़ा करता है। जनता पूछ रही है कि क्या इतने बड़े स्तर पर हो रही कथित अनियमितताओं से बेखबर रहना प्रशासनिक लापरवाही है या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गईं?

क्या केवल 'कागजी प्रतिलिपि' तक सीमित रहेगी जेडी कार्यालय की जिम्मेदारी?
चौंकाने वाली बात यह है कि इस कथित वित्तीय गड़बड़ी की विस्तृत शिकायत खुद संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास (राजकिशोर नगर, बिलासपुर) को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की जा चुकी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जेडी कार्यालय इन गंभीर आरोपों पर निष्पक्षता से त्वरित संज्ञान लेकर जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक करेगा और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेगा, या फिर प्रशासनिक रसूख के चलते मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि इस कथित 'बंदरबांट' के पीछे किन-किन जिम्मेदारों की मूक सहमति या संरक्षण हासिल था।
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कोरबा कटघोरा
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