कागजी घोड़े दौड़ा रही कटघोरा पालिका: : मूल निवासी किसान संघ को थमाया 'झुनझुना', अमरपुर गौठान के नाम पर सिर्फ आंख में धूल झोंकने का खेल!
Shubh Arvind Sharma
Sat, Aug 22, 2026
कागजी घोड़े दौड़ा रही कटघोरा पालिका: मूल निवासी किसान संघ को थमाया 'झुनझुना', अमरपुर गौठान के नाम पर सिर्फ आंख में धूल झोंकने का खेल!
कटघोरा। अपनी कुंभकर्णी नींद के लिए मशहूर नगर पालिका परिषद कटघोरा की कलई एक बार फिर खुल गई है। मूल निवासी किसान संघ छत्तीसगढ़ की जायज मांगों को दबाने के लिए पालिका प्रशासन ने अपनी पुरानी फितरत के मुताबिक केवल कागजी दावों का ऐसा 'झुनझुना' पकड़ाया है, जिसे देखकर जनता और किसानों का खून उबल रहा है। पालिका की बातें सिर्फ 'हवाहवाई' और जमीनी स्तर पर 'ढाक के तीन पात' यानी बिल्कुल जीरो साबित हो रही हैं।

भीतरखाने से आई आवाज: 'विश्वासघात' का बदला घेराव से देगी संघ!
इस बीच मूल निवासी किसान संघ के भीतरखाने से बेहद आक्रामक और बड़ी खबर छनकर बाहर आ रही है। संघ के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, किसान इस सरकारी कागजी पुलिंदे और धोखे को कतई स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं। संघ के भीतर यह आवाज बुलंद हो चुकी है कि नगर पालिका ने किसानों की पीठ पर छुरा घोंपा है और इस विश्वासघात का करारा जवाब पालिका प्रशासन को सीधे घेरकर दिया जाएगा।
किसान अब चुप बैठने वाले नहीं हैं, बल्कि इस झूठे आश्वासन के खिलाफ पालिका से सीधा और आर-पार का सवाल करने की रणनीति तैयार कर रहे हैं। चर्चा है कि बहुत जल्द संघ रणनीति का खुलासा कर पालिका की ईंट से ईंट बजाने के लिए सड़क पर उतरेगा।

अमरपुर गौठान के नाम पर 'ऊंट के मुंह में जीरा' जैसी कार्रवाई
पालिका प्रशासन ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को भेजे प्रतिवेदन में बड़ी-बड़ी डींगें हांकते हुए दावा किया है कि सड़कों पर विचरण कर रहे आवारा मवेशियों को काउ केचर वाहन से पकड़कर ग्राम अमरपुर गौठान भेजा जा रहा है।
लेकिन कटघोरा की जनता पूछ रही है कि अगर मवेशी सच में अमरपुर भेजे जा रहे हैं, तो वो 'कागजी मवेशी' कौन से हैं जो आज भी शहर की छाती पर मूंग दल रहे हैं? पालिका का यह दावा 'रात गई, बात गई' की तरह सिर्फ समय काटने का पैंतरा और किसानों की आंख में धूल झोंकने का खेल बनकर रह गया है।

सड़कों पर मवेशियों का मौत का जाल, पालिका 'घी के दीए' जलाने में व्यस्त
एक तरफ पालिका अपनी पीठ थपथपा रही है, तो दूसरी तरफ सड़कों पर आवारा मवेशियों ने ऐसा जाल बिछा रखा है कि राहगीरों की जान हलक में अटकी रहती है।
* सड़कें बनीं तबेला: कटघोरा के मुख्य मार्ग और चौराहे मवेशियों के चंगुल में हैं। आए दिन गाड़ियां टकरा रही हैं, लोग लहूलुहान हो रहे हैं, लेकिन पालिका प्रशासन 'धृतराष्ट्र' बनकर तमाशा देख रहा है।
* किसानों के अरमानों पर पानी: रात होते ही ये मवेशी किसानों के खेतों को उजाड़ रहे हैं। दिन-रात एक करने वाले अन्नदाता की मेहनत पर पालिका की लापरवाही पानी फेर रही है।

धरना और भूख हड़ताल से घबराई पालिका, चल दी 'कागजी चाल'
मूल निवासी किसान संघ छत्तीसगढ़ द्वारा 11 अगस्त से 14 अगस्त तक दिए गए चार दिवसीय धरने और 15 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की चेतावनी ने पालिका अधिकारियों के हाथ-पैर फुला दिए थे। इस आक्रामक आंदोलन की आग से बचने के लिए पालिका ने आनन-फानन में बस स्टैंड पर सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाने और 3 दिन के भीतर सुलभ शौचालय चमकाने का 'घिसा-पिटा' आश्वासन दे डाला।

किसान संघ की दोटूक: 'काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती'
मूल निवासी किसान संघ ने पालिका के इस खोखले प्रतिवेदन को सिरे से खारिज करते हुए सीधे तौर पर महासंग्राम का ऐलान कर दिया है। संघ का कहना है कि पालिका प्रशासन 'नौ दिन चले अढ़ाई कोस' की तर्ज पर रेंग रहा है। जब तक ग्राम अमरपुर गौठान भेजने का दावा धरातल पर नहीं उतरता और शहर की सड़कें मवेशी मुक्त नहीं होतीं, तब तक आंदोलन की यह चिंगारी शांत नहीं होगी। पालिका को अब अपनी 'अफसरशाही और हवाहवाई' कार्यप्रणाली का खामियाजा भुगतने के लिए तैयार रहना होगा।
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कोरबा कटघोरा
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