नगर पालिका की तानाशाही के खिलाफ कटघोरा में फूटा गुस्सा: : 'गूंगे-बहरे' प्रशासन को जगाने आज से सड़क पर उतरा मूलनिवासी किसान संघ, 15 अगस्त से मरणव्रत का एलान!
Shubh Arvind Sharma
Tue, Aug 11, 2026
नगर पालिका की तानाशाही के खिलाफ कटघोरा में फूटा गुस्सा: 'गूंगे-बहरे' प्रशासन को जगाने आज से सड़क पर उतरा मूलनिवासी किसान संघ, 15 अगस्त से मरणव्रत का एलान!
कटघोरा। कटघोरा नगर पालिका परिषद में बैठे हुक्मरानों की कुंभकर्णी नींद और प्रशासनिक ढुलमुल रवैये ने आखिरकार जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है। आम जनता की बुनियादी सहूलियतों को ठेंगा दिखाने वाले अफसरों को औकात याद दिलाने के लिए मूलनिवासी किसान संघ छत्तीसगढ़ ने अब आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। 27 जुलाई को सौंपे गए अल्टीमेटम पर जब अफसरों ने कानों में तेल डालकर चुप्पी साधे रखी, तो संघ ने आज (11 अगस्त) से चार दिवसीय उग्र धरना-प्रदर्शन की शुरुआत कर ईंट से ईंट बजाने का साफ संदेश दे दिया है। संघ ने दो टूक लहजे में चेताया है कि अगर 14 अगस्त तक उनकी तीन जायज मांगें पूरी नहीं हुईं, तो 15 अगस्त से अफसरशाही के खिलाफ मरणव्रत (अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल) शुरू होगी।
'आवेदन, निवेदन और फिर दनादन' – गुरसिया जैसे सुलगते हालात बनने की चर्चा तेज
राजनीतिक गलियारों और स्थानीय जानकारों की मानें तो मूलनिवासी किसान संघ का यह आंदोलन नगरीय प्रशासन की चूलें हिला सकता है। चूंकि इस आंदोलन को गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा) का भी अंदरूनी और मजबूत समर्थन प्राप्त है, इसलिए चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। जानकारों का कहना है कि गोंगपा का सीधा और कड़ा नियम है—'पहले आवेदन, फिर निवेदन और अगर बात न बनी तो सीधा दनादन!'
अब गोंगपा से जुड़े चेहरों और आदिवासी समाज का इस तरह खुलकर सामने आना प्रशासन के लिए खतरे की घंटी है। अंदरखाने यह चर्चाएं भी तेज हो गई हैं कि कटघोरा का यह गतिरोध कहीं 'गुरसिया' जैसे हिंसक और उग्र हालात की तरफ तो नहीं बढ़ रहा है? अगर प्रशासन ने समय रहते सुध नहीं ली, तो यह चिंगारी किसी भी समय बड़े विस्फोट का रूप ले सकती है और इसकी पूरी गाज नगरीय प्रशासन पर गिरना तय है।

बैठक में 'ढाक के तीन पात', सीएमओ की गोलमोल बातों से भड़का आक्रोश
संघ के अध्यक्ष लालबहादुर सिंह कोर्राम ने प्रशासनिक तंत्र पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अफसर सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाना जानते हैं। सोमवार को एसडीएम टी.एल. भारद्वाज की मौजूदगी में हुई बैठक में नगर पालिका सीएमओ मुद्रिका प्रसाद तिवारी ने केवल अंगूठा दिखाने और गोलमोल जवाब देकर मामले को टालने का काम किया। बैठक का नतीजा 'ढाक के तीन पात' रहा। जनहित से जुड़े इतने संवेदनशील मुद्दों पर नगर पालिका का यह अंधेर नगरी चौपट राजा वाला रवैया अब बर्दाश्त से बाहर हो चुका है।
इन 3 सुलगते मुद्दों पर आर-पार की जंग:
1. सड़कों पर यमदूत बने आवारा मवेशी: कटघोरा के मुख्य मार्गों पर आवारा पशुओं का जमावड़ा आम जनता के लिए गले की हड्डी बन चुका है। आए दिन राहगीर लहूलुहान हो रहे हैं, लेकिन पालिका प्रशासन आंखें मूंदकर किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। संघ की मांग है कि इनका तुरंत स्थायी ठिकाना तय हो।
2. राम भरोसे यात्रियों की सुरक्षा, सीसीटीवी गायब: बस स्टैंड परिसर में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है, जिससे बहू-बेटियों और छात्राओं की सुरक्षा दांव पर लगी है। इसके बावजूद यात्री प्रतीक्षालय में सीसीटीवी कैमरे न लगाना प्रशासन की शर्मनाक लापरवाही को उजागर करता है।
3. सुलभ शौचालय पर ताला, जनता बेहाल: बस स्टैंड के सुलभ शौचालय में सुविधाओं का अकाल है। 24 घंटे बिजली-पानी और कर्मचारियों की तैनाती न होना यात्रियों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।
15 अगस्त को मनेगा 'भूख हड़ताल का जश्न', सोए प्रशासन की उड़ेगी नींद
संघ के पदाधिकारियों ने गरजते हुए कहा कि ये मांगें कोई खैरात नहीं, बल्कि जनता का बुनियादी हक हैं। आम नागरिकों, व्यापारियों,महिलाओं और विद्यार्थियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले अफसरों को अब चैन से बैठने नहीं दिया जाएगा। 11 से 14 अगस्त तक चलने वाले इस धरने से भी अगर बहरी सरकार और अंधे प्रशासन की आंखें नहीं खुलीं, तो 15 अगस्त को देश जब आजादी का जश्न मना रहा होगा, तब कटघोरा की जनता अपने हक के लिए अन्न-जल त्यागकर भूख हड़ताल पर बैठ जाएगी।
इस बार आंदोलनकारी जी-जान की बाजी लगाने को तैयार हैं। देव प्रसाद रत्नाकर, विजय जायसवाल, प्रमोद अग्रवाल, सैय्यद रफीक अहमद और राम सिंह समेत सैकड़ों युवाओं ने साफ कर दिया है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
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कोरबा कटघोरा
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