लाखों फूंककर कटघोरा में बनाई 'नरक की चौपाटी', : न शेड, न लाइट; भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा DMF का फंड, विधायक-अध्यक्ष के लोकार्पण दावों की निकली 'हवा'!
Shubh Arvind Sharma
Mon, Aug 10, 2026
लाखों फूंककर कटघोरा में बनाई 'नरक की चौपाटी', न शेड, न लाइट; भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा DMF का फंड, विधायक-अध्यक्ष के लोकार्पण दावों की निकली 'हवा'!
कटघोरा (sharma news): सरकारी खजाने में सेंधमारी और प्रशासनिक अंधेर नगरी चौपट राजा का इससे बड़ा नजारा छत्तीसगढ़ में कहीं और देखने को नहीं मिलेगा। कटघोरा के वार्ड क्रमांक 02 पुष्पवाटिका के सामने ₹19.41 लाख रू. की भारी-भरकम लागत से बनी चमचमाती चौपाटी आज अव्यवस्था के कीचड़ में सिसक रही है। जनता को स्वच्छ और सुंदर माहौल देने के नाम पर शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट आज भ्रष्टाचार की गंगा में नहाकर पूरी तरह खोखला हो चुका है। चारों तरफ पसरी बजबजाती गंदगी, सड़ते कचरे के ढेर और आवारा मवेशियों के तांडव के बीच गरीब व्यवसायी दुकान लगाने को मजबूर हैं, जिससे आम जनता के सिर पर मौत की तलवार लटक रही है।

लोकार्पण पट्टी पर सजे नाम, जमीन पर सिर्फ 'कागजी घोड़े' और गंदगी का साम्राज्य
गौरतलब है कि जिला खनिज न्यास मद (DMF) के पैसे से बनी इस चौपाटी का लोकार्पण 10 जुलाई 2025 को मुख्य अतिथि कटघोरा विधायक माननीय श्री प्रेमचंद पटेल जी और कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे नगर पालिका परिषद अध्यक्ष माननीय श्री राज जायसवाल जी की गरिमामय उपस्थिति में बड़े ही शानो-शोकत के साथ हुआ था,

तब नेताओं ने आसमान के तारे तोड़ने जैसे दावे किए थे, लेकिन महज एक साल के भीतर ही प्रशासनिक दावों का गुब्बारा फूट गया है। लोकार्पण की चमचमाती शिलापट्टिका पर तो वीआईपी नाम बड़े-बड़े अक्षरों में सजे हैं, लेकिन धरातल पर प्रशासन ने जनता को अंगूठा दिखा दिया है।

न शेड, न लाइट और न ही पार्किंग; निर्माण में जमकर बंटा 'मलाई' (घोटाला!)
स्थानीय नागरिकों और दुकानदारों का सीधा आरोप है कि इस चौपाटी के निर्माण कार्य में जमकर हाथ साफ किया गया है (घोटाला हुआ है)। लाखों रुपये पानी की तरह बहाने के बाद भी चौपाटी में न तो दुकानदारों और ग्राहकों के लिए शेड की कोई व्यवस्था है और न ही रात के समय लाइटिंग का कोई उचित इंतजाम। शाम ढलते ही यहाँ चिराग तले अंधेरा पसर जाता है। रही-सही कसर पार्किंग की अनुपस्थिति पूरी कर देती है, लोग अपनी गाड़ियां सीधे चौपाटी परिसर के भीतर घुसाकर भेड़-चाल मचा देते हैं, जिससे हमेशा किसी बड़े हादसे का अंदेशा बना रहता है।

आवारा मवेशियों का डेरा, महिलाओं और बच्चों का जीना मुहाल
चौपाटी परिसर अब सांडों और आवारा मवेशियों का अखाड़ा बन चुका है। खाने-पीने की दुकानों के आसपास मवेशी इस तरह मंडराते हैं कि यहाँ आने वाली महिलाओं और बच्चों के हाथ-पांव फूल जाते हैं। सुकून के दो पल बिताने की चाहत में आने वाले लोग यहाँ आ बैल मुझे मार की स्थिति में फंस जाते हैं। इस गंदगी के दलदल में भिनभिनाती मक्खियां सीधे खाने के सामानों पर बैठकर पीलिया, डायरिया और हैजा जैसी बीमारियों का जहर परोस रही हैं।

अफसर से लेकर नेता तक सब मार रहे 'अंधे की लाठी', किसी को नहीं दिखती दुर्दशा
हैरानी की बात यह है कि इस मार्ग से रोज अधिकारी से लेकर बड़े-बड़े नेता तक अपनी चमचमाती गाड़ियों में आँखें मूंदकर गुजरते हैं। लेकिन इन सफेदपोशों और साहबों को धरातल पर पसरा यह नरक नजर नहीं आता। नगर पालिका प्रशासन यहाँ के दुकानदारों से पाई-पाई का टैक्स और शुल्क वसूलने में तो शेर बना फिरता है, लेकिन जब बात शेड, लाइट या सफाई की बुनियादी सुविधाएं देने की आती है, तो मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) का अमला भीगी बिल्ली बनकर गायब हो जाता है।

क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा प्रशासन?
जनता की दोटूक चेतावनी
करदाताओं की गाढ़ी कमाई के लाखों रुपये को इस तरह भ्रष्टाचार की दीमक से चट करवा देने वाले अधिकारियों पर गाज कब गिरेगी? क्या नगर पालिका प्रशासन किसी बड़ी महामारी या हादसे के बाद कुंभकर्णी नींद से जागेगा? स्थानीय नागरिकों और दुकानदारों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि तत्काल चौपाटी परिसर की सूरत नहीं बदली गई, लाइट, शेड और पार्किंग की मुकम्मल व्यवस्था नहीं हुई, तो वे आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन अख्तियार कर सकते हैं जिसकी पूरी जिम्मेदारी सोए हुए प्रशासन की होगी।
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कोरबा कटघोरा
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