: घोटालेबाज नगर पालिका का बड़ा कारनामा उजागर– शॉपिंग काम्प्लेक्स के लिए आरक्षित शासकीय भूमि रसूखदारों के हवाले!
Shubh Arvind Sharma
Tue, Jul 22, 2025
घोटालेबाज नगर पालिका का बड़ा कारनामा उजागर–
शॉपिंग काम्प्लेक्स के लिए आरक्षित शासकीय भूमि रसूखदारों के हवाले!
कोरबा:कटघोरा नगर पालिका परिषद में भ्रष्टाचार अब संस्थागत स्वरूप ले चुका है। जनता की गाढ़ी कमाई से बनने वाले शॉपिंग काम्प्लेक्स की ज़मीन पर अब रसूखदारों की दावेदारी है और नगर पालिका मूकदर्शक नहीं, बल्कि पूरी तरह से भागीदार बनी हुई है। पिछले कुछ समय से पालिका द्वारा कराए गए निर्माण कार्य पहले ही सवालों के घेरे में हैं — चाहे वो 19.41 लाख की चौपाटी हो या 62.69 लाख की पुष्पवाटिका, जिन्हें लोकार्पण के कुछ ही समय बाद भ्रष्टाचार का प्रतीक बना दिया गया। अब पालिका की करतूतें एक और गंभीर मोड़ पर आ चुकी हैं, जहाँ सरकारी ज़मीन को पहले काम्प्लेक्स के नाम पर स्वीकृति दिलाई गई और बाद में उसे राखड़ भराई के नाम पर निजी हाथों में सौंप दिया गया।
वार्ड क्रमांक 15 की शासकीय भूमि खसरा नंबर 71/2, रकबा 0.365 हेक्टेयर को नगर पालिका द्वारा वर्ष 2024 में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स निर्माण हेतु आरक्षित किया गया था। इस परियोजना के लिए 57.43 लाख रुपये की निविदा निकाली गई, जिसे कोरबा की मे. अभिषेक एसोसिएट को स्वीकृत किया गया और 19 फरवरी 2024 को बाकायदा कार्यादेश भी जारी किया गया। यह कार्यादेश बताता है कि चार माह की अवधि में इस शासकीय भूमि पर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण पूरा होना था।
लेकिन जब 21 अप्रैल 2025 को इसी भूमि को लेकर नगर पालिका ने एक पत्र जारी कर अनिल अग्रवाल नामक स्थानीय रसूखदार को राखड़ भराई की अनुमति प्रदान कर दी, तब पूरा मामला संदेह के घेरे में आ गया। यह वही भूमि है जिस पर कुछ महीनों पहले तक शॉपिंग काम्प्लेक्स बनने की स्वीकृति दी गई थी। आखिर ऐसी कौन-सी ताकत है जो नगर पालिका को उसके ही आदेशों को उलटने पर मजबूर कर रही है? क्या विकास योजनाएं केवल घोटालों की पर्दा पोशी के लिए इस्तेमाल हो रही हैं?
स्थिति और भी गंभीर तब हो जाती है जब हल्का पटवारी की जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से सामने आता है कि अनिल अग्रवाल और चंदन बघेल नामक व्यक्तियों द्वारा उक्त भूमि पर न केवल कब्जा कर राखड़ पटाई की जा रही है, बल्कि खसरा नंबर 72 की अतिरिक्त भूमि पर भी अवैध कब्जा कर लिया गया है। यानी घोटाला केवल एक परियोजना तक सीमित नहीं, बल्कि शासकीय भूमि पर सुनियोजित कब्जा और नियमों की धज्जियाँ उड़ाने का खुला खेल चल रहा है — और यह सब नगर पालिका की जानकारी में।
विचारणीय है कि वर्ष 2022–23 में तत्कालीन नगर अध्यक्ष के कार्यकाल में जिस शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की योजना को स्वीकृति दी गई थी, उसी ज़मीन पर वर्ष 2025 में रसूखदार कब्जा कर रहे हैं — और पालिका उनके लिए ग्रीन सिग्नल बना रही है। यह पूरा प्रकरण यह सिद्ध करने के लिए काफी है कि नगर पालिका के भीतर बैठी व्यवस्था पूरी तरह से गिर चुकी है। अब घोटाले आम बात हो चुके हैं, और जवाबदेही एक मज़ाक।
कटघोरा की जनता को अब यह समझना होगा कि उनके वोट से चुनकर पहुंचे जनप्रतिनिधि और नियुक्त अधिकारी, दोनों ने मिलकर विकास के नाम पर भ्रष्टाचार का महल खड़ा कर लिया है। जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए भटक रही है और उधर शासकीय संपत्ति पर निजी महल बसाए जा रहे हैं। अगर अब भी आवाज़ नहीं उठी, तो कटघोरा में विकास नहीं, सिर्फ लूट और धोखा बचेगा।
वार्ड क्रमांक 15 की शासकीय भूमि खसरा नंबर 71/2, रकबा 0.365 हेक्टेयर को नगर पालिका द्वारा वर्ष 2024 में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स निर्माण हेतु आरक्षित किया गया था। इस परियोजना के लिए 57.43 लाख रुपये की निविदा निकाली गई, जिसे कोरबा की मे. अभिषेक एसोसिएट को स्वीकृत किया गया और 19 फरवरी 2024 को बाकायदा कार्यादेश भी जारी किया गया। यह कार्यादेश बताता है कि चार माह की अवधि में इस शासकीय भूमि पर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण पूरा होना था।
लेकिन जब 21 अप्रैल 2025 को इसी भूमि को लेकर नगर पालिका ने एक पत्र जारी कर अनिल अग्रवाल नामक स्थानीय रसूखदार को राखड़ भराई की अनुमति प्रदान कर दी, तब पूरा मामला संदेह के घेरे में आ गया। यह वही भूमि है जिस पर कुछ महीनों पहले तक शॉपिंग काम्प्लेक्स बनने की स्वीकृति दी गई थी। आखिर ऐसी कौन-सी ताकत है जो नगर पालिका को उसके ही आदेशों को उलटने पर मजबूर कर रही है? क्या विकास योजनाएं केवल घोटालों की पर्दा पोशी के लिए इस्तेमाल हो रही हैं?
स्थिति और भी गंभीर तब हो जाती है जब हल्का पटवारी की जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से सामने आता है कि अनिल अग्रवाल और चंदन बघेल नामक व्यक्तियों द्वारा उक्त भूमि पर न केवल कब्जा कर राखड़ पटाई की जा रही है, बल्कि खसरा नंबर 72 की अतिरिक्त भूमि पर भी अवैध कब्जा कर लिया गया है। यानी घोटाला केवल एक परियोजना तक सीमित नहीं, बल्कि शासकीय भूमि पर सुनियोजित कब्जा और नियमों की धज्जियाँ उड़ाने का खुला खेल चल रहा है — और यह सब नगर पालिका की जानकारी में।
विचारणीय है कि वर्ष 2022–23 में तत्कालीन नगर अध्यक्ष के कार्यकाल में जिस शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की योजना को स्वीकृति दी गई थी, उसी ज़मीन पर वर्ष 2025 में रसूखदार कब्जा कर रहे हैं — और पालिका उनके लिए ग्रीन सिग्नल बना रही है। यह पूरा प्रकरण यह सिद्ध करने के लिए काफी है कि नगर पालिका के भीतर बैठी व्यवस्था पूरी तरह से गिर चुकी है। अब घोटाले आम बात हो चुके हैं, और जवाबदेही एक मज़ाक।
कटघोरा की जनता को अब यह समझना होगा कि उनके वोट से चुनकर पहुंचे जनप्रतिनिधि और नियुक्त अधिकारी, दोनों ने मिलकर विकास के नाम पर भ्रष्टाचार का महल खड़ा कर लिया है। जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए भटक रही है और उधर शासकीय संपत्ति पर निजी महल बसाए जा रहे हैं। अगर अब भी आवाज़ नहीं उठी, तो कटघोरा में विकास नहीं, सिर्फ लूट और धोखा बचेगा।Tags :
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