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: कोरबा:छुरी एकलव्य विद्यालय में छात्रा ने पीया डेटॉल..! सुरक्षा व्यवस्था पर सवालों की बौछार!

Shubh Arvind Sharma

Sun, Jul 6, 2025
कोरबा:छुरी एकलव्य विद्यालय में छात्रा ने पीया डेटॉल..! सुरक्षा व्यवस्था पर सवालों की बौछार! कोरबा/छुरी। जिले के छुरी स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय से बेहद चौंकाने वाली और चिंताजनक घटना सामने आई है। कक्षा 9वीं में पढ़ने वाली एक छात्रा ने डेटॉल पी लिया, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। आनन-फानन में छात्रा को कटघोरा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के बाद उसकी हालत फिलहाल खतरे से बाहर बताई जा रही है। लेकिन इस पूरी घटना ने एक बार फिर विद्यालय प्रबंधन की घोर लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रा ने खांसी की दवाई समझ कर पीया डेटॉल? छात्रा ने दावा किया है कि उसने खांसी की दवाई समझकर डेटॉल का सेवन कर लिया, लेकिन सवाल ये उठता है कि एक पढ़ी-लिखी 9वीं की छात्रा क्या वास्तव में डेटॉल और दवाई में फर्क नहीं कर सकी? या फिर यह बयान किसी दबाव में दिया गया है? विद्यालय प्रबंधन और अधीक्षिका ने मीडिया के सवालों से बचते हुए बयान देने से इनकार कर दिया, जिससे शक और भी गहरा गया है। डेटॉल छात्रावास में खुला कैसे मिला? यह भी एक बड़ा सवाल है कि ऐसा खतरनाक केमिकल छात्रावास में छात्राओं की पहुंच में कैसे आया? क्या कोई निगरानी व्यवस्था नहीं है? यदि डेटॉल खुले में या पहुंच योग्य स्थान पर रखा गया था, तो यह सीधे तौर पर प्रबंधन की लापरवाही और सुरक्षा की विफलता को दर्शाता है। क्या छात्रा मानसिक दबाव में थी? घटना के पीछे छात्रा की मानसिक स्थिति, शैक्षणिक दबाव, या फिर अन्य सामाजिक कारणों की भी जांच आवश्यक है। अगर यह कदम किसी मानसिक तनाव या बुलिंग (दबाव/शोषण) के कारण उठाया गया है तो यह और भी भयावह संकेत है। एकलव्य विद्यालयों की गरिमा पर दाग एकलव्य विद्यालयों को आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा के मॉडल के रूप में पेश किया जाता है। लेकिन छुरी में सामने आई यह घटना इस गरिमा को ध्वस्त करती है। जब स्कूल के अंदर ही बच्चों की जान असुरक्षित हो, तो फिर ऐसे मॉडल पर भरोसा कैसे किया जाए? प्रशासन, जनप्रतिनिधि और शिक्षा विभाग को तत्काल सख्त जांच और कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि छात्र-छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और दोषियों को जवाबदेह ठहराया जा सके। वरना "एकलव्य" जैसे आदर्श कहे जाने वाले संस्थान, सिर्फ नाम के रह जाएंगे।

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