अटल मूर्ति महाघोटाला: क्या 'ऊपर' तक बंटी है कमीशन की मलाई? : सूत्रों का बड़ा दावा— बिलासपुर के आकाओं की शरण में कटघोरा CMO, मिला तगड़ा 'अभयदान'!
Shubh Arvind Sharma
Sun, Aug 2, 2026
अटल मूर्ति महाघोटाला: क्या 'ऊपर' तक बंटी है कमीशन की मलाई? सूत्रों का बड़ा दावा— बिलासपुर के आकाओं की शरण में कटघोरा CMO, मिला तगड़ा 'अभयदान'!
पूर्व के 'कागजी पाइपलाइन घोटाले' को दबाने का भी खुला सनसनीखेज राज!
कटघोरा (कोरबा)।
कटघोरा नगर पालिका का 'अटल परिसर मूर्ति घोटाला' अब सिर्फ एक स्थानीय फर्जीवाड़ा नहीं रहा, बल्कि इसके तार राजधानी से लेकर संभाग के सबसे बड़े दफ्तरों तक जुड़ते नजर आ रहे हैं। जैसे-जैसे इस घोटाले की परतें उधड़ रही हैं, वैसे-वैसे दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली होने की बात सच साबित हो रही है। हमारे हाथ लगे सब-इंजीनियर के 'लिखित कबूलनामे' के बाद, अब अंदरखाने से जो छनकर खबर आ रही है, उसने पूरे प्रशासनिक अमले को सक्ते में डाल दिया है।
विश्वस्त सूत्रों से मिली बेहद सनसनीखेज जानकारी के मुताबिक, कटघोरा के मुख्य नगरपालिका अधिकारी मुद्रिका प्रसाद तिवारी (CMO) पर अब तक कोई गाज इसलिए नहीं गिरी है क्योंकि उन्हें बिलासपुर के दो बड़े आकाओं का सीधा 'अभयदान' और वरदहस्त प्राप्त है!
बिलासपुर के 'सुरक्षा कवच' में साहब! आखिर क्यों मेहरबान हैं बड़े अफसर?
सियासी गलियारों और विभागीय सूत्रों की मानें तो जब से इस घोटाले की गूंज बिलासपुर संभाग और रायपुर तक पहुंची है, तब से कटघोरा CMO को बचाने के लिए बिलासपुर के दो बड़े आकाओं ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
कटघोरा में हर जुबान पर अब यही तीखा सवाल है कि आखिर बिलासपुर के दो आका इस CMO पर इतने मेहरबान क्यों हैं?
राजनैतिक पंडित इसके पीछे के कड़वे सच से पर्दा उठा रहे हैं:
कमीशन का 'ऊपर' तक का खेल: सूत्रों का दावा है कि साहब की पदस्थापना के बाद से नगर पालिका में भ्रष्टाचार को जो 'पंख' लगे थे, उसकी मलाई सिर्फ कटघोरा तक सीमित नहीं थी। बिलासपुर बैठे इन बड़े साहबों की तिजोरियों तक भी कमिशन का हिस्सा नियमित रूप से पहुंच रहा था। यही कारण है कि आज जब CMO की कुर्सी पर संकट आया है, तो ये बड़े अधिकारी खुद को बचाने के लिए CMO को अभयदान दे रहे हैं।
जांच फाइलों को दबाने की कोशिश: चर्चा गर्म है कि उच्च स्तरीय जांच टीम के गठन और CMO पर संभावित दंडात्मक कार्रवाई की फाइलों को बिलासपुर दफ्तर में ही ठंडे बस्ते में डालने का खेल रचा जा रहा है।
...और जब गड़े मुर्दे उखड़े, तो निकला 'कागजी पाइपलाइन घोटाला'!
साहब के रसूख और बिलासपुर के अधिकारियों की इस 'मेहरबानी' के पीछे का एक और काला अध्याय अब चौराहे पर आ चुका है। सूत्रों के मुताबिक, यह पहली बार नहीं है जब बिलासपुर के साहब कटघोरा के घोटालों पर पर्दा डालने आए हों। इससे पहले कटघोरा नगर पालिका में एक बहुत बड़ा पाइपलाइन विस्तार घोटाला हुआ था।
हकीकत यह थी कि जमीन पर पाइपलाइन का विस्तार हुआ ही नहीं था, लेकिन कागजों पर फर्जी तरीके से काम दिखाकर लाखों-करोड़ों रुपयों का आहरण (payment) कर डकार लिया गया। जब इस बिना काम के पैसे निकालने वाले महाघोटाले की शिकायत हुई, तो बिलासपुर के अधिकारी खुद कटघोरा जांच करने पहुंचे थे। लेकिन हुआ क्या? जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई, अधिकारियों और ठेकेदारों की बंद कमरों में 'सेटिंग' हुई और उस पूरे मामले को ठंडे बस्ते में दबा दिया गया। जब पुराने पापों पर बड़े साहबों ने खुद मिट्टी डाली हो, तो भला आज वे इस CMO को अकेले कैसे छोड़ सकते हैं?

इसीलिए आधी रात को 'कुचला' गया था कांग्रेस का धरना!
अब जाकर यह बात शीशे की तरह साफ हो चुकी है कि आखिर क्यों आधी रात को भारी प्रशासनिक दबाव बनाकर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के धरने को जबरन रफा-दफा कराया गया था।
प्रशासन को इस बात का भली-भांति अंदाजा था कि यदि यह धरना दो दिन और खिंच जाता, तो पाइपलाइन घोटाले से लेकर अटल मूर्ति घोटाले तक, बिलासपुर के इन बड़े मगरमच्छों के नाम भी चौराहे पर सरेआम नीलाम हो जाते। अपने आकाओं की चमड़ी बचाने और अपनी खुद की कुर्सी को सेफ एग्जिट देने के लिए ही CMO साहब ने ऊपर के इशारे पर उस लोकतांत्रिक आंदोलन का एनकाउंटर करवा दिया। हालांकि, चर्चा यह भी है कि इस तगड़े 'प्रशासनिक चक्रव्यूह' को देखकर आंदोलनकारी भी रात होते-होते भीगी बिल्ली बन गए और चुपचाप सरेंडर कर मैदान से नौ दो ग्यारह हो गए।
पदस्थापना के बाद से मची अंधेरगर्दी, अब खुलेगा 'पाप का घड़ा'
जब से वर्तमान CMO की यहां पदस्थापना हुई है, तब से निर्माण कार्यों में नियमों को ताक पर रख दिया गया है। सब-इंजीनियर चंद्र प्रकाश जायसवाल का जो सरकारी पत्र (दिनांक 29/07/2026) सामने आया है, उसने साफ कर दिया था कि निरीक्षण के दौरान CMO खुद मौके पर मौजूद थे। इसके बावजूद, बिलासपुर के आकाओं द्वारा सिर्फ एक छोटे सब-इंजीनियर को सस्पेंड कर मामले में इतिश्री कर लेना यह साबित करता है कि 'सइयां भए कोतवाल तो अब डर काहे का!' बड़े अफसरों की शह पर ही कटघोरा नगर पालिका भ्रष्टाचार का चारागाह बनी हुई है।
पहले बिना काम के पाइपलाइन का पैसा डकार जाना और अब भारत रत्न अटल जी के सम्मान से खिलवाड़ कर सीमेंट की मूर्ति खड़ा करना— यह साबित करता है कि कटघोरा नगर पालिका में भ्रष्टाचार का एक अभेद्य किला बन चुका है। बिलासपुर के आका जिस तरह इस भ्रष्ट तंत्र को अभयदान दे रहे हैं, वह छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक तंत्र पर एक करारा तमाचा है। लेकिन इन सफेदपोशों को यह समझ लेना चाहिए कि काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती। जनता सब देख रही है और जब जन-आक्रोश का घड़ा फूटेगा, तो बिलासपुर से लेकर कटघोरा तक का यह पूरा भ्रष्ट सिंडिकेट ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगा!
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कोरबा कटघोरा
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