लीक पेपर से खुला राज, CMO तिवारी ही महाघोटाले के असली 'सरताज'! : तीन दिन पहले बोरिया-बिस्तर बांध भागने वाले कांग्रेसी फिर आक्रामक, कलेक्टर को दी उग्र आंदोलन की खुली चेतावनी!
Shubh Arvind Sharma
Mon, Aug 3, 2026
लीक पेपर से खुला राज, CMO तिवारी ही महाघोटाले के असली 'सरताज'! तीन दिन पहले बोरिया-बिस्तर बांध भागने वाले कांग्रेसी फिर आक्रामक, कलेक्टर को दी उग्र आंदोलन की खुली चेतावनी!
कटघोरा/कोरबा: छत्तीसगढ़ के कटघोरा नगर पालिका में पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा निर्माण में हुए महाघोटाले को लेकर सियासी ड्रामा और नौटंकी चरम पर पहुंच गई है। पहली ही बारिश में 'भ्रष्टाचार का पेंट' उखड़ने और कांस्य की जगह सीमेंट-कंक्रीट का पाप बाहर आने के बाद, अब कांग्रेसियों के पेट में फिर से जबरदस्त गुड़गुड़ शुरू हो गई है। प्रशासन द्वारा केवल एक सब-इंजीनियर को सस्पेंड कर 'इतिश्री' करने की कोशिशों पर भड़की युवा कांग्रेस एक बार फिर से अपनी राजनीति चमकाने मैदान में कूद पड़ी है।

दिलचस्प बात यह है कि अभी महज तीन दिन पहले ही कांग्रेसी इसी मुद्दे को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे थे, जहां जनता के समर्थन के अभाव और प्रशासनिक सख्ती के आगे इन्हें महज कुछ ही घंटों में अपना बोरिया-बिस्तर बांधकर दुम दबाकर भागना पड़ा था। लेकिन अपनी उस 'फजीहत' को भुलाकर कांग्रेसियों ने एक बार फिर करवट बदली है। युवा कांग्रेस कोरबा (ग्रामीण) के जिलाध्यक्ष विकास सिंह के नेतृत्व में आज कार्यकर्ताओं ने 'अंधेर नगरी चौपट राजा' जैसी प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कलेक्टर के नाम एक तीखा ज्ञापन सौंपा है। कांग्रेसियों ने साफ लफ्ज़ों में चेतावनी दी है कि अगर तीन दिन के भीतर असली 'मगरमच्छों' पर शिकंजा नहीं कसा गया, तो कटघोरा की सड़कों पर ऐसा उग्र आंदोलन होगा कि प्रशासन के हाथ-पांव फूल जाएंगे।
उप अभियंता चंद्रप्रकाश जायसवाल के 'लीक पेपर' ने खोला राज, CMO की संलिप्तता उजागर!
इस पूरे महाभ्रष्टाचार और सियासी घमासान की मुख्य कड़ी और असली जड़ कोई और नहीं, बल्कि नगर पालिका के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CMO) मुद्रिका प्रसाद तिवारी हैं। अब तक प्रशासन यह कहकर पल्ला झाड़ रहा था कि बड़े अधिकारियों को इसकी कानों-कान खबर नहीं थी, लेकिन निलंबित उप अभियंता (सब-इंजीनियर) चंद्रप्रकाश जायसवाल के लीक हुए कागजात और सरकारी पत्राचार ने इस झूठ का पूरी तरह जनाजा निकाल दिया है।
लीक हुए दस्तावेजों से यह बिल्कुल शीशे की तरह साफ हो गया है कि CMO मुद्रिका प्रसाद तिवारी को इस पूरे घटिया निर्माण और वित्तीय हेराफेरी की ए टू ज़ेड जानकारी पहले से थी। फाइलों पर उनके हस्ताक्षर और नोटशीट गवाही दे रहे हैं कि इस 'खेल' में वे अनभिज्ञ नहीं, बल्कि मूकदर्शक या बराबर के हिस्सेदार बने हुए थे। नगर पालिका के किसी भी निर्माण कार्य, टेंडर प्रक्रिया और भुगतान की अंतिम चाबी CMO के पास ही होती है। ऐसे में लीक पेपर सामने आने के बाद अब जनता और विपक्षी दल खुलेआम पूछ रहे हैं कि आखिर सरकार और जिला प्रशासन इन पर इतना मेहरबान क्यों हैं? मुद्रिका प्रसाद तिवारी को किसका 'वरदहस्त' प्राप्त है जो इतने पुख्ता सबूतों के बाद भी इनका बाल भी बांका नहीं हुआ?

पहली बारिश ने धो डाला 'ईमानदारी' का चोला!
कहते हैं कि 'सांच को आंच नहीं', लेकिन कटघोरा नगर पालिका के हुक्मरानों ने तो कागजों पर ब्रॉन्ज (कांसा) की मूर्ति दिखाकर जनता की गाढ़ी कमाई के लाखों रुपये 'डकार' लिए। जैसे ही मानसून की पहली फुहार पड़ी, प्रतिमा का रंग-रोगन ताश के पत्तों की तरह ढह गया। जनता के सामने जैसे ही कंक्रीट का सच आया, भ्रष्टाचार की पोल 'चौराहे पर हांडी फूटने' की तरह खुल गई।
शतरंज के मोहरे की बलि देकर 'शहंशाह' को बचाने का खेल!
इस पूरे मामले में जब बवाल मचा, तो नगरीय प्रशासन विभाग ने उप अभियंता (सब-इंजीनियर) चंद्र प्रकाश जायसवाल को सस्पेंड कर अपनी पीठ थपथपा ली। लेकिन कांग्रेस का कहना है कि यह तो केवल 'बलि का बकरा' बनाने का खेल है। युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष विकास सिंह ने तीखा हमला बोलते हुए कहा:
"जब लीक कागजात खुद चिल्ला-चिल्लाकर कह रहे हैं कि असली सूत्रधार कौन है, तो फिर प्रशासन छोटे कर्मचारियों पर गाज गिराकर 'घी के घड़े' पर बैठे मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) मुद्रिका प्रसाद तिवारी और भ्रष्ट ठेकेदारों को 'अभयदान' देने की फिराक में क्यों है? जब तक बड़े मगरमच्छ सलाखों के पीछे नहीं जाते, यह लड़ाई थमने वाली नहीं है।"

ज्ञापन की 3 'सख्त' मांगें:
* दूध का दूध और पानी का पानी हो: लीक पेपर को संज्ञान में लेते हुए पूरे प्रतिमा निर्माण प्रकरण की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
* बड़ों पर गिरे गाज: केवल छोटे प्यादों पर नहीं, बल्कि मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) मुद्रिका प्रसाद तिवारी और संबंधित ठेकेदार की भूमिका की जांच कर उनके खिलाफ 'हंटर' चलाया जाए।
* सबूतों से छेड़छाड़ बंद हो: जांच पूरी होने तक प्रतिमा को अपनी जगह से हटाने या उसमें किसी भी प्रकार का फेरबदल (साक्ष्य व दस्तावेजों को छुपाने की कोशिश) करने पर तत्काल रोक लगाई जाए।
3 दिन का अल्टीमेटम... क्या फिर बंधेगा बोरिया-बिस्तर?
कांग्रेसियों ने अनुविभागीय अधिकारी (SDM) कार्यालय, तहसील और कटघोरा थाने में ज्ञापन की पावती ठोकते हुए प्रशासन को 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। पत्र में दोटूक शब्दों में कहा गया है कि यदि 3 दिनों के भीतर मांगों पर ठोस और कड़ी कार्रवाई नहीं की जाती, तो युवा कांग्रेस 'ईंट से ईंट बजाने' के लिए तैयार है। इसके बाद अनुविभागीय अधिकारी (SDM) कटघोरा कार्यालय के सामने उग्र आंदोलन किया जाएगा।
अब देखना यह होगा कि तीन दिन पहले अनिश्चितकालीन धरने से 'नौ दो ग्यारह' होने वाले कांग्रेसी इस बार नए सबूतों के दम पर अपनी चेतावनी पर टिक पाते हैं या फिर इस बार भी उनका यह आंदोलन महज एक 'गीदड़ भभकी' साबित होगा और सबूत लीक होने के बाद भी CMO मुद्रिका प्रसाद तिवारी अपनी कुर्सी पर महफूज बने रहेंगे!
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