अटल प्रतिमा विवाद में घिरे कटघोरा के 'सूरमाओं' की हवा टाइट, : अब मूलनिवासी किसान संघ के धरने से छूटे नगर पालिका के पसीने; आर-पार के मूड में जनता!
Shubh Arvind Sharma
Wed, Aug 12, 2026
अटल प्रतिमा विवाद में घिरे कटघोरा के 'सूरमाओं' की हवा टाइट, अब मूलनिवासी किसान संघ के धरने से छूटे नगर पालिका के पसीने; आर-पार के मूड में जनता!
कटघोरा। कटघोरा में भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ अब जनता का गुस्सा ज्वालामुखी बनकर फूट पड़ा है। एक तरफ जहां भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा का मामला गरमाने के बाद से इलाके के कद्दावर नेता और रसूखदार अधिकारी 'भीगी बिल्ली' बनकर 'भूमिगत' (जमींदोज) हो चुके हैं, वहीं दूसरी तरफ नगर पालिका के काले कारनामों के खिलाफ 'मूलनिवासी किसान संघ छत्तीसगढ़' ने सीधे तौर पर जंग का ऐलान कर दिया है। तीन प्रमुख ज्वलंत मुद्दों को लेकर शुरू हुए चार दिवसीय महा-धरना प्रदर्शन का आज दूसरा दिन था, जिसने सोए हुए प्रशासनिक अमले की चूूलें हिलाकर रख दी हैं।
'अंडरग्राउंड' हुए साहब और नेता, दूरबीन लेकर ढूंढ रही जनता
* नौ दो ग्यारह हुए जिम्मेदार: अटल जी की प्रतिमा से जुड़े तीखे सवालों के डर से जो अधिकारी और नेता पहले सीना चौड़ा करके घूमते थे, आज वे जनता को शक्ल दिखाने से भी कतरा रहे हैं। उनके फोन बंद जैसी स्थिति में हैं और दफ्तरों से वे ऐसे गायब हैं जैसे 'गधे के सिर से सींग'।
* सवालों से लगी मिर्ची: मीडिया और आम जनता के आक्रोश को देखकर इन 'कागजी शेरों' के हाथ-पैर फूल गए हैं। सालों से मलाई खा रहे अफसरों को अब डर सता रहा है कि बाहर निकलते ही जनता उनके भ्रष्टाचार के कच्चे चिट्ठे खोल देगी।
मूलनिवासी किसान संघ की ललकार, अब भूख हड़ताल की तैयारी
* अटल परिसर पर धरना: कटघोरा नगर पालिका की तानाशाही के खिलाफ मूलनिवासी किसान संघ के बैनर तले आज दूसरे दिन भी धरना स्थल पर किसान डटे रहे,शांतिपूर्ण धरना ने प्रशासन की जनविरोधी नीतियों की धज्जियां उड़ाई गईं।
* भूख हड़ताल का अल्टीमेटम: आंदोलनकारियों ने सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि यह तो सिर्फ ट्रेलर है। अगर तीनों प्रमुख मांगों पर तुरंत एक्शन नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में उग्र भूख हड़ताल की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
* टूट गया सब्र का बांध: अब कटघोरा की जागरूक जनता अन्याय के आगे घुटने टेकने के मूड में नहीं है। बंद कमरों में चलने वाले भ्रष्टाचार के खेल को खत्म करने के लिए लोग अब खुद ढाल बनकर सड़कों पर उतर आए हैं।
खोदा पहाड़, निकली चुहिया; कब तक छुपेंगे 'शुतुरमुर्ग'?
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि कटघोरा नगर पालिका में 'अंधेर नगरी चौपट राजा' का खेल अब और नहीं चलेगा। पूरा प्रशासनिक अमला 'एक ही थैली के चट्टे-बट्टे' बनकर भले ही एक-दूसरे को बचाने और लीपापोती करने में जुटा हो, लेकिन जनता की इस खुली बगावत ने इनकी रातों की नींद उड़ा दी है। देखना दिलचस्प होगा कि खुद को 'जनता का सेवक' बताने वाले ये सफेदपोश नेता और रिश्वतखोर अफसर कब तक 'शुतुरमुर्ग' की तरह रेत में सिर छुपाकर सच से भागते हैं!
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कोरबा कटघोरा
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