मूसलाधार आफत में 'अंगद का पैर' बने किसान; : तीसरे दिन ही छूटी नगर पालिका की घिग्घी, नगर अध्यक्ष एल्डरमैन और पार्षदों की फौज दौड़ी धरना स्थल!
Shubh Arvind Sharma
Fri, Aug 14, 2026
मूसलाधार आफत में 'अंगद का पैर' बने किसान; तीसरे दिन ही छूटी नगर पालिका की घिग्घी, नगर अध्यक्ष एल्डरमैन और पार्षदों की फौज दौड़ी धरना स्थल!

क्या कांग्रेसी नेता विकास सिंह की तरह यहाँ भी रची जा रही है 'आश्वासन' वाली गहरी साज़िश? हल्के में लिया तो कटघोरा में भी बन सकते हैं गुरसिया जैसे 'दनादन' हालात!
कटघोरा (ब्यूरो चीफ):
मौसम की मार पर भारी पड़ा अन्नदाता का रौद्र रूप आसमान से बरसती मूसलाधार आफत और कड़कड़ाती बिजली भी मूलनिवासी किसान संघ छत्तीसगढ़ के खून का उबाल कम नहीं कर पाई। जलभराव और डूबो देने वाली बारिश के बीच किसान आंदोलनकारी लोहे के चने चबाने को मजबूर करने वाले हौसले के साथ डटे रहे। किसानों के इस अडिग और आक्रामक रुख ने तीसरे दिन ही नगरीय प्रशासन की हवा निकाल दी।

एसी कमरों से निकल कर धरना स्थल पर आए हुक्मरान:
बंद कमरों में बैठकर कुंभकर्णी नींद सो रहे जनप्रतिनिधियों और अफसरों को आखिरकार बैकफुट पर आना ही पड़ा। हालात की गंभीरता और किसानों के गुस्से को भांपते हुए नगर अध्यक्ष, एल्डरमैन और पार्षदों की पूरी फौज के तोते उड़ गए और वे खुद चलकर अटल परिसर नगर पालिका कटघोरा के समक्ष धरना स्थल पर पहुंचे तथा आंदोलनकारियों के सामने मांगे पूरी करने गिड़गिड़ाने लगे।

जनहित की इन 3 प्रमुख मांगों पर आर-पार की जंग:
मूलनिवासी किसान संघ ने साफ कर दिया है कि शासन-प्रशासन की आँख पर बंधी पट्टी और घोर लापरवाही अब और बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसानों ने 27/07/2026 को दिए गए ज्ञापन पर कोई कार्रवाई न होने के विरोध में यह मोर्चा खोला है। आंदोलनकारियों की माँगें सीधे तौर पर जनहित से जुड़ी हैं:
1. नगर मार्गों पर आवारा मवेशी प्रबंधन करना।
2. कटघोरा यात्री प्रतीक्षालय में CCTV कैमरे लगवाना।
3. बस स्टैंड सुलभ शौचालय को 24 घंटे चालू रखना।

दौड़े चले आए जिम्मेदार, थमाया आश्वासन का 'लॉलीपॉप':
किसानों के रौद्र रूप और गगनभेदी नारों की गूंज ने सीधे नगर पालिका के गलियारों की चूलें हिला दीं। तीसरे दिन उम्मीद से कई गुना ज्यादा किसानों के जनसैलाब ने नगर पालिका दफ्तर के भीतर तगड़ा हड़कंप मचा दिया और जिम्मेदार अधिकारियों के चेहरों की हवाइयां उड़ गईं। आंदोलन की इस धधकती चिंगारी को ठंडा करने के लिए नगर अध्यक्ष और पार्षदों ने आनन-फानन में किसानों की इन सभी मांगों को जल्द पूरा करने का लिखित और मौखिक आश्वासन तो दे दिया है, लेकिन किसान इसे महज 'कागजी घोड़े दौड़ाना' मान रहे हैं।

विकास सिंह के आंदोलन जैसा 'धोखा' होने की शंका:
नगर पालिका के इस अचानक बदले रुख को देखकर अब धरना स्थल से लेकर पूरे क्षेत्र में गंभीर चर्चाएं और शंकाएं पैदा हो गई हैं। लोग खुलकर सवाल उठा रहे हैं कि क्या कांग्रेसी नेता विकास सिंह के आंदोलन को महज कोरे आश्वासन देकर ठंडे बस्ते में डालने और खत्म कर देने की नीयत की तरह ही, यहाँ भी मूलनिवासी किसान संघ को कोई झूठा आश्वासन देकर गुमराह करने की कोई गहरी साज़िश तो नहीं रची जा रही? किसानों के बीच यह अंदेशा गहरा रहा है कि प्रशासन सिर्फ समय काटने और इस उग्र आंदोलन की हवा निकालने के लिए वादों का जाल बुन रहा है।

गुरसिया जैसे 'दनादन' हालात की सुगबुगाहट, हल्के में लिया तो ईंट से ईंट बजना तय:
क्षेत्र में अब कयासों का बाजार गर्म है कि प्रशासन इस आंदोलन को कतई हल्के में लेने की भूल न करे। दबी जुबान में चर्चाएं तेज हैं कि अगर दिए गए आश्वासनों पर तुरंत अमल नहीं हुआ तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाएगी और यहाँ भी गुरसिया जैसे दनादन और हिंसक टकराव वाले विस्फोटक हालात पैदा हो सकते हैं।

कल 14 अगस्त को आखिरी दिन उमड़ेगा हजारों का सैलाब:
11 अगस्त से शुरू हुआ यह 4 दिवसीय धरना कल 14 अगस्त 2026 को अपने आखिरी दिन हजारों की संख्या में किसानों के जुटने के कयास के साथ और उग्र रूप ले सकता है, जिससे निपटना प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर साबित होगा?

15 अगस्त से 'करो या मरो' की स्थिति, भूख-हड़ताल का एलान:
किसानों ने भी साफ लहजे में चेतावनी दे दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो 15 अगस्त 2026 प्रातः 10 बजे से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। किसानों ने साफ कर दिया है कि वे अपनी जमीन और हक के लिए ईंट से ईंट बजाने को तैयार हैं और बिना ठोस कार्रवाई के यहाँ से नौ दो ग्यारह नहीं होंगे।
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कोरबा कटघोरा
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