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: ---तानाखार शासकीय भूमि घोटाला: राजस्व अफसरों की मिलीभगत से सरकारी ज़मीन का हुआ सौदा, मामला पहुंचा मंत्रालय..! कलेक्टर को दिए गए जांच के निर्देश..

Shubh Arvind Sharma

Fri, Jun 27, 2025
---तानाखार शासकीय भूमि घोटाला: राजस्व अफसरों की मिलीभगत से सरकारी ज़मीन का हुआ सौदा, मामला पहुंचा मंत्रालय..! कलेक्टर को दिए गए जांच के निर्देश.. पटवारी से लेकर एसडीएम तक कि भूमिका संदेहास्पद..? अधिकारियों पर 50-50 लाख रुपये लेने के गम्भीर आरोप..? कोरबा :-ज़िले के तहसील पोड़ी उपरोड़ा अंतर्गत ग्राम तानाखार में स्थित शासकीय कृषि भूमि की अवैध बिक्री का एक बड़ा मामला सुर्खियों में बना हुआ है। इस मामले की गूंज मंत्रालय तक पहुँच गई है।मंत्रालय ने जिला कलेक्टर को जांच कर आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए हैं।यह ज़मीन वर्ष 1974-75 में शासकीय उपयोग हेतु आबंटित की गई थी, लेकिन कागज़ों की बाज़ीगरी और अधिकारियों की मिलीभगत से वर्ष 2020 में एक निजी व्यक्ति को बेच दी गई। पूरे प्रकरण को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है और शिकायत अब मंत्रालय तक पहुंच चुकी है। ______क्या है पूरा मामला? ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम तानाखार में खसरा नंबर 731/9, रकबा 0.619 हेक्टेयर भूमि को वर्ष 1974-75 में महेशपुर निवासी मोर्ध्वजपुरी पिता सूर्यभान पूरी को अस्थायी रूप से कृषि उपयोग हेतु आबंटित किया गया था। दस्तावेज़ों के अनुसार न तो मोर्ध्वजपुरी ने कभी उस भूमि पर कब्जा लिया और न ही खेती की। लेकिन हैरानी की बात यह है कि 46 वर्षों बाद, वर्ष 2020 में उक्त भूमि को कटघोरा निवासी अशफाक अली ने तौकीर अहमद के नाम 10 लाख रुपये में चेक के माध्यम से बेच दिया, और यह सौदा आम मुख्तियारनामा के आधार पर किया गया। शिकायत में क्या आरोप लगाए गए? शिकायतकर्ता रामकुमार व अन्य ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि यह सौदा बिना किसी वैध स्वामित्व या अधिकार के किया गया है। उन्होंने बताया कि: मोर्ध्वजपुरी का न तो कब्जा था, न ही विक्रय का कोई वैधानिक अधिकार। फिर भी अशफाक अली द्वारा उक्त जमीन को मुख्तियारनामा बनवाकर बेचना यह साबित करता है कि यह पूरा सौदा फर्जी दस्तावेजों और राजस्व अमले की मिलीभगत से किया गया। पटवारी, राजस्व निरीक्षक (RI), पंजीयन कार्यालय और एसडीएम की भूमिका संदिग्ध है, क्योंकि इनकी अनुमति व सत्यापन के बिना न तो रजिस्ट्री होती है और न ही नामांतरण।इतना ही नही शिकायतकर्ताओ ने अपनी शिकायत में इस बात का भी जिक्र किया है कि इस खेल में सरकारी अफसरों ने 50-50 लाख रुपये लिए है तथा 1BHK व 2BHK फ्लैट अफसरों को दिए जाने का जिक्र भी है। मंत्रालय ने लिया संज्ञान, कलेक्टर को पत्र जारी शिकायत के आधार पर मामला राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के संज्ञान में लाया गया है, जिसके बाद विभाग के अवर सचिव ने कोरबा कलेक्टर को पत्र जारी किया है। पत्र में पूरे प्रकरण की जांच कर दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, उच्च स्तरीय जांच दल जल्द ही गांव में निरीक्षण कर सकता है और संबंधित दस्तावेज़ों की वैधता को परखेगा। इससे पहले भी कोरबा ज़िले में भूमि घोटालों की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन यह मामला शासन तक पहुंच गया है जिससे प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। ग्रामीणों की मांग: दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई ग्रामीणों ने कहा है कि यह मामला केवल एक भूमि बिक्री का नहीं बल्कि शासकीय ज़मीन के लूट की सुनियोजित साज़िश है। ग्रामीणों की मांग है ,सभी दोषी अधिकारियों और दलालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आपराधिक कार्रवाई की जाए ,शासकीय भूमि को तुरंत राजस्व रिकॉर्ड में शासन के नाम पर बहाल किया जाए। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए डिजिटल मैपिंग और सख्त निगरानी व्यवस्था लागू की जाए। क्या कहते हैं विशेषज्ञ? भूमि मामलों के जानकारो का कहना है: > "यदि भूमि शासकीय थी और उसका वैध रूप से किसी को स्वामित्व नहीं सौंपा गया, तो उसकी बिक्री कानूनन अमान्य है। इसमें राजस्व अधिकारियों की सहमति या चुप्पी भी दंडनीय अपराध की श्रेणी में आती है। क्या होगी आगे की कार्रवाई..? प्रशासन के सूत्रों का कहना है कि मंत्रालय से प्राप्त निर्देश के अनुसार: तहसील स्तर पर प्रारंभिक जांच शुरू की जा रही है। संबंधित पटवारी, आरआई और एसडीएम के कार्यकाल की समीक्षा की जा रही है। संदेहास्पद दस्तावेज़ों की विधि विशेषज्ञों द्वारा जांच कराई जाएगी। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो न केवल शासकीय ज़मीन वापस ली जाएगी, बल्कि दोषियों पर विभागीय और आपराधिक कार्रवाई भी होगी। तानाखार का यह मामला छत्तीसगढ़ में शासकीय ज़मीन की अवैध बिक्री के बढ़ते मामलों की एक कड़ी है, जो यह दर्शाता है कि यदि आम जनता जागरूक होकर विरोध न करे तो अफसरशाही के खेल में शासकीय संपत्तियां भी निजी जेबों में चली जाती हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को दबाएगा या दोषियों को जेल की राह दिखाएगा।

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