: पोड़ी उपरोड़ा:आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती में बड़ा फ्राड...? आवेदनकर्ता ने लगाए गम्भीर आरोप..!
Shubh Arvind Sharma
Tue, Mar 11, 2025
पोड़ी उपरोड़ा:आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती में बड़ा फ्राड...? आवेदनकर्ता ने लगाए गम्भीर आरोप..!
पोड़ी उपरोड़ा:जिले के ब्लाक पोड़ी उपरोड़ा में आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती में हुए घोटाले को लेकर चौकाने वाली बातें सामने आ रही है।जो आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती को लेकर कई सवाल खड़े करते हैं।यहां एक आवेदनकर्ता ने परियोजना अधिकारी की कुत्सित कार्यशैली को उजागर करते हुए दस्तावेज गायब करने के आरोप लगाए हैं।अब आवेदनकर्ता के दस्तावेज विभाग से गायब हो जाना कई सवाल खड़े करता है।विभाग की इस लापरवाही से पात्र आवेदनकर्ता अपात्र हो गई।अब आप समझ सकते हैं पोड़ी उपरोड़ा का एकीकृत महिला बाल विकास विभाग अपने कार्यो को लेकर कितना लापरवाह है या घोटालों में डूबा हुआ है..? अगर आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती को लेकर निष्पक्ष जांच हुई तो सहायिका भर्ती की पोल खुलना तय है तथा जिम्मेदारों की कार्यशैली भी स्पष्ट होगी..?
प्राप्त जानकारी अनुसार विकासखण्ड पोड़ी उपरोड़ा के एकीकृत महिला एवम बाल विकास विभाग में आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती निकाली गई थी,जहां इछुक आवेदनकर्ताओ ने आवेदन जमा किये थे।वही ग्राम पँचायत बरबसपुर के ग्राम छेवधरा में भी वैकेंसी निकाली गई थी जहां फूलबाई कंवर पति संतकुमार कंवर ने भी आवेदन के साथ दस्तावेज जमा किये थे।जब विभाग द्वारा चयन सूची चस्पा की गई तो चस्पा सूची को देखकर फूलबाई हतप्रभ रह गई,दरअसल सूची में फूलबाई को अंक ही नही दिए गए,जबकि फूलबाई ने सभी दस्तावेज जमा किये थे।जब इसने विभाग के जिम्मेदारो से इस संबंध में जानने का प्रयास किया गया तो बताया गया कि तुम्हारी अंक सूची जमा नही थी जिस कारण तुम्हे अंक नही दिए गए हैं।ये सुनकर आवेदनकर्ता फूलबाई के होश फाख्ता हो गए,इन्होंने कहा ये कैसे हो सकता है..! मेरे द्वारा सत्यापित अंक सूची की छायाप्रति फार्म के साथ जमा की गई थी।मेरी अंक सूची कैसे गायब हो गई..? जबकि मेरिट बेस में हो रही सहायिका भर्ती फार्म में स्पष्ट उल्लेख है कि 8 वी का अंकसूची अनिवार्य होगा, लिहाजा समस्त आवेदन कर्ताओ ने अंकसूची निश्चित रूप से आवेदन फार्म के साथ जमा की है तो फूल बाई की अंकसूची कैसे गायब हो गई.? यह परियोजना कार्यालय के नोकरशाहो कि बडी लापरवाही है या किसी चहेते आवेदनकर्ता को नियुक्ति प्रदान करने की साजिश है..? यह जांच का विषय है।
जब फूलबाई को विभागीय कर्मचारियों के द्वारा अंकसूची जमा नही करने की बात कही तो,फूलबाई को समझने में देर नही लगी कि विभाग के नोकरशाहो ने अंक सूची गायब कर अन्य किसी का चयन कर मुझे अपात्र साबित कर दिया है।जबकि मेरिट लिस्ट के अनुसार फूलबाई का चयन होना तय था,चयन सूची में अंकसूची के कारण अंक नही मिलने से हताश फूलबाई ने न्याय पाने जिला कलेक्टर से गुहार लगाकर अंकसूची गुमा देने वाले परियोजना विभाग के जिम्मेदारों पर कार्यवाही करने की मांग की थी।अब उक्त शिकायत में किस तरह की कार्यवाही हुई यह स्पष्ट नही है।
परियोजना कार्यालय में जमा किये गए दस्तावेजो की पावती आवेदनकर्ताओ को दी गई थी वही फूलबाई को भी कार्यालय से पावती प्राप्त हुई थी।लेकिन किसी गुरुघंटाल ने आवेदिका फूलबाई को नोकरी लगाने का झांसा देकर 30 हजार रुपये ले लिए थे और जब चयन सूची में आवेदिका का नाम नही आया तो गुरुघंटाल ने आवेदिका को दोषी ठहराते हुए आवेदिका के पैसे वापस कर दिए।चयन नही होने छुब्ध आवेदिका ने गुरुघंटाल से अपनी पावती मांगी तो उसने बताया कि पावती परियोजना अधिकारी के पति के पास है,वहाँ जाकर ले लो.अब आप समझ सकते हैं सहायिका भर्ती घोटाला किस मुकाम तक जारी था।बहरहाल शिकायत कर्ता आवेदिका ने इस बात का जिक्र अपने आवेदन भी किया है।मतलब साफ है जिस तरह की बाते सामने आ रही है उसके साफ जाहिर होता है कि कही ना कहीं आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती को लेकर परियोजना अधिकारी ने जमकर भर्राशाही करते हुए नियुक्ति का खेल खेला है।अब देखना ये है कि उक्त भर्ती की जांच होती है या ये मुद्दा भी दफ्तरों की फाइलों में गुम हो जाएगा..?
प्राप्त जानकारी अनुसार विकासखण्ड पोड़ी उपरोड़ा के एकीकृत महिला एवम बाल विकास विभाग में आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती निकाली गई थी,जहां इछुक आवेदनकर्ताओ ने आवेदन जमा किये थे।वही ग्राम पँचायत बरबसपुर के ग्राम छेवधरा में भी वैकेंसी निकाली गई थी जहां फूलबाई कंवर पति संतकुमार कंवर ने भी आवेदन के साथ दस्तावेज जमा किये थे।जब विभाग द्वारा चयन सूची चस्पा की गई तो चस्पा सूची को देखकर फूलबाई हतप्रभ रह गई,दरअसल सूची में फूलबाई को अंक ही नही दिए गए,जबकि फूलबाई ने सभी दस्तावेज जमा किये थे।जब इसने विभाग के जिम्मेदारो से इस संबंध में जानने का प्रयास किया गया तो बताया गया कि तुम्हारी अंक सूची जमा नही थी जिस कारण तुम्हे अंक नही दिए गए हैं।ये सुनकर आवेदनकर्ता फूलबाई के होश फाख्ता हो गए,इन्होंने कहा ये कैसे हो सकता है..! मेरे द्वारा सत्यापित अंक सूची की छायाप्रति फार्म के साथ जमा की गई थी।मेरी अंक सूची कैसे गायब हो गई..? जबकि मेरिट बेस में हो रही सहायिका भर्ती फार्म में स्पष्ट उल्लेख है कि 8 वी का अंकसूची अनिवार्य होगा, लिहाजा समस्त आवेदन कर्ताओ ने अंकसूची निश्चित रूप से आवेदन फार्म के साथ जमा की है तो फूल बाई की अंकसूची कैसे गायब हो गई.? यह परियोजना कार्यालय के नोकरशाहो कि बडी लापरवाही है या किसी चहेते आवेदनकर्ता को नियुक्ति प्रदान करने की साजिश है..? यह जांच का विषय है।
जब फूलबाई को विभागीय कर्मचारियों के द्वारा अंकसूची जमा नही करने की बात कही तो,फूलबाई को समझने में देर नही लगी कि विभाग के नोकरशाहो ने अंक सूची गायब कर अन्य किसी का चयन कर मुझे अपात्र साबित कर दिया है।जबकि मेरिट लिस्ट के अनुसार फूलबाई का चयन होना तय था,चयन सूची में अंकसूची के कारण अंक नही मिलने से हताश फूलबाई ने न्याय पाने जिला कलेक्टर से गुहार लगाकर अंकसूची गुमा देने वाले परियोजना विभाग के जिम्मेदारों पर कार्यवाही करने की मांग की थी।अब उक्त शिकायत में किस तरह की कार्यवाही हुई यह स्पष्ट नही है।
परियोजना कार्यालय में जमा किये गए दस्तावेजो की पावती आवेदनकर्ताओ को दी गई थी वही फूलबाई को भी कार्यालय से पावती प्राप्त हुई थी।लेकिन किसी गुरुघंटाल ने आवेदिका फूलबाई को नोकरी लगाने का झांसा देकर 30 हजार रुपये ले लिए थे और जब चयन सूची में आवेदिका का नाम नही आया तो गुरुघंटाल ने आवेदिका को दोषी ठहराते हुए आवेदिका के पैसे वापस कर दिए।चयन नही होने छुब्ध आवेदिका ने गुरुघंटाल से अपनी पावती मांगी तो उसने बताया कि पावती परियोजना अधिकारी के पति के पास है,वहाँ जाकर ले लो.अब आप समझ सकते हैं सहायिका भर्ती घोटाला किस मुकाम तक जारी था।बहरहाल शिकायत कर्ता आवेदिका ने इस बात का जिक्र अपने आवेदन भी किया है।मतलब साफ है जिस तरह की बाते सामने आ रही है उसके साफ जाहिर होता है कि कही ना कहीं आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती को लेकर परियोजना अधिकारी ने जमकर भर्राशाही करते हुए नियुक्ति का खेल खेला है।अब देखना ये है कि उक्त भर्ती की जांच होती है या ये मुद्दा भी दफ्तरों की फाइलों में गुम हो जाएगा..?Tags :
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